चालक-परिचालकों को बड़ी राहत, विवाद निपटान होगा अब तेज और आसान
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लखनऊ। उत्तर प्रदेश परिवहन निगम ने संविदा चालक और परिचालकों के हित में बड़ा और अहम फैसला लिया है। अब विवादों के निस्तारण के लिए बनने वाली आर्बिट्रेशन समिति में सदस्यों की संख्या 5 से घटाकर 3 कर दी गई है। इस बदलाव से लंबित मामलों का तेजी से निपटारा हो सकेगा।
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परिवहन राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) दयाशंकर सिंह ने बताया कि संविदा कर्मियों के अनुबंध से जुड़े मामलों में लगातार देरी हो रही थी, जिससे चालक-परिचालकों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा था। इसी समस्या को देखते हुए यह अहम निर्णय लिया गया है।
अब तक आर्बिट्रेशन एक्ट 1996 की धारा 10(1) के तहत 5 सदस्यीय समिति बनाई जाती थी, जिसमें कई अधिकारी शामिल होते थे। लेकिन नई व्यवस्था के अनुसार अब क्षेत्रीय प्रबंधक के साथ सिर्फ दो अन्य अधिकारियों को शामिल कर 3 सदस्यीय समिति बनाई जाएगी।
सरकार का मानना है कि इस छोटे और प्रभावी ढांचे से फैसलों में तेजी आएगी और चालक-परिचालकों के मामलों का समय पर निपटारा सुनिश्चित हो सकेगा।
👉 असर क्या होगा?
- लंबित मामलों का जल्द निस्तारण
- संविदा कर्मियों को राहत
- प्रक्रिया होगी सरल और तेज
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परिवहन निगम का यह फैसला हजारों चालक-परिचालकों के लिए राहत भरी खबर है, जो लंबे समय से अपने मामलों के निपटारे का इंतजार कर रहे थे।


