टोल पर नई दरें लागू हुए तीन दिन, सफर अब भी महंगा; वाहन चालकों में नाराज़गी बरकरार

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  • 21 जुलाई से लागू नई टोल दरों का असर जारी, चार महीने में दूसरी बार बढ़ा शुल्क
  • वाहन चालकों और परिवहन कारोबारियों में बढ़ी नाराज़गी

अमन प्रताप सिंह 

उन्नाव। नवाबगंज टोल प्लाजा पर 21 जुलाई से लागू की गई नई टोल दरों का असर अब साफ दिखाई देने लगा है। 23 जुलाई तक वाहन चालक बढ़े हुए टोल शुल्क का भुगतान कर रहे हैं, जबकि परिवहन व्यवसाय से जुड़े लोगों और स्थानीय यात्रियों में इस बढ़ोतरी को लेकर नाराज़गी बनी हुई है। सभी श्रेणियों के वाहनों के लिए टोल शुल्क बढ़ने से लंबी दूरी की यात्रा और माल ढुलाई की लागत पर सीधा असर पड़ रहा है।

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चार महीने में दूसरी बार बढ़ीं दरें, उठ रहे सवाल

राष्ट्रीय राजमार्गों पर सामान्यतः टोल शुल्क का वार्षिक संशोधन 1 अप्रैल को किया जाता है। इस वर्ष अप्रैल में संशोधित दरें लागू होने के बाद अब जुलाई में दोबारा शुल्क बढ़ा दिया गया। महज चार महीने के भीतर दूसरी बार हुई इस बढ़ोतरी को लेकर वाहन चालक सवाल उठा रहे हैं कि आखिर इतनी जल्द संशोधन की आवश्यकता क्यों पड़ी।

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एक्सप्रेसवे बनने के बाद बदला ट्रैफिक का रुख

लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे शुरू होने के बाद बड़ी संख्या में वाहन अब पुराने राष्ट्रीय राजमार्ग की बजाय एक्सप्रेसवे का इस्तेमाल कर रहे हैं। बेहतर सड़क, कम समय और सुगम यात्रा के कारण नवाबगंज टोल प्लाजा पर वाहनों की संख्या पहले की तुलना में कम होने की चर्चाएं लगातार सामने आ रही हैं।

राजस्व नुकसान की चर्चा, आधिकारिक पुष्टि नहीं

स्थानीय स्तर पर यह भी चर्चा है कि एक्सप्रेसवे शुरू होने के बाद नवाबगंज टोल प्लाजा के राजस्व में कमी आई है और प्रतिदिन लाखों रुपये का नुकसान हो रहा है। हालांकि, इस संबंध में भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) की ओर से कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है। इसलिए इस दावे को फिलहाल केवल स्थानीय चर्चाओं तक ही सीमित माना जा सकता है।

क्या कम ट्रैफिक की भरपाई के लिए बढ़ा टोल?

टोल शुल्क बढ़ाने के आदेश में कहीं भी यह नहीं कहा गया है कि राजस्व में कमी इसकी वजह है। फिर भी जिस समय यह निर्णय लागू किया गया, उसने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। लोगों के बीच चर्चा है कि क्या घटते ट्रैफिक की भरपाई बढ़े हुए टोल शुल्क से की जाएगी या भविष्य में टोल नीति की समीक्षा की जाएगी।

वर्तमान टोल दरें (21 जुलाई से लागू)

  • कार, जीप, वैन (LMV): ₹100 (एकल यात्रा), ₹150 (रिटर्न)
  • हल्के व्यावसायिक वाहन/मिनी बस: ₹160
  • दो एक्सल बस/ट्रक: ₹340
  • तीन एक्सल वाहन: ₹370
  • चार से छह एक्सल भारी वाहन: ₹535
  • सात या अधिक एक्सल वाहन: ₹650

20 किलोमीटर दायरे के स्थानीय गैर-व्यावसायिक वाहन मालिकों के लिए:

  • मासिक पास: ₹360
  • वार्षिक पास: ₹3,075

परिवहन कारोबारियों में असंतोष

परिवहन व्यवसाय से जुड़े लोगों का कहना है कि डीजल की कीमत, वाहन रखरखाव और अन्य परिचालन खर्च पहले से ही बढ़े हुए हैं। ऐसे में टोल शुल्क में दोबारा बढ़ोतरी का असर माल ढुलाई की लागत और यात्रियों के किराए पर पड़ना तय है।

अब निगाहें ट्रैफिक और राजस्व के आंकड़ों पर

नई टोल दरें लागू हुए तीन दिन बीत चुके हैं। आने वाले समय में यह स्पष्ट होगा कि बढ़ी हुई दरों से टोल राजस्व में कितना इज़ाफा होता है और ट्रैफिक पर इसका क्या प्रभाव पड़ता है। फिलहाल इतना तय है कि नवाबगंज टोल प्लाजा से गुजरने वाले वाहन चालकों की यात्रा पहले की तुलना में महंगी हो गई है।

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