- रास लफ़्फ़ान और मेसाईद प्लांट बंद, भारतीय कंपनियों ने गैस आपूर्ति घटाई; ऊर्जा सुरक्षा पर मंडराया संकट
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नई दिल्ली/दोहा:
पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच कतर ने भारत को होने वाली LNG (लिक्विफाइड नेचुरल गैस) आपूर्ति में भारी कटौती कर दी है। यह कदम उस समय उठाया गया जब ईरान ने सोमवार को कतर के दो बड़े गैस प्लांट — रास लफ़्फ़ान इंडस्ट्रियल सिटी और मेसाईद इंडस्ट्रियल सिटी — पर शक्तिशाली हमला किया। हमले के बाद कतर ने सुरक्षा कारणों से दोनों प्लांट अस्थायी रूप से बंद करने का फैसला किया।
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कतर की सरकारी ऊर्जा कंपनी QatarEnergy के इन प्लांटों से दुनिया के कई देशों को LNG की सप्लाई होती है। उत्पादन रुकने से वैश्विक गैस बाजार में हड़कंप मच गया है और स्पॉट LNG की कीमतों में उछाल दर्ज किया गया है।
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भारत पर क्या असर?
भारत अपनी प्राकृतिक गैस जरूरतों का बड़ा हिस्सा कतर से आयात करता है। ऐसे में आपूर्ति में कटौती का सीधा असर देश की ऊर्जा व्यवस्था पर पड़ा है। सूत्रों के मुताबिक, भारतीय गैस कंपनियों ने इंडस्ट्रीज को दी जाने वाली गैस सप्लाई में कटौती शुरू कर दी है ताकि प्राथमिकता घरेलू उपभोक्ताओं और बिजली उत्पादन को दी जा सके।
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खाद, पेट्रोकेमिकल, सिटी गैस डिस्ट्रीब्यूशन और पावर सेक्टर पर इसका असर दिखने लगा है। यदि हालात लंबे समय तक बने रहे तो गैस आधारित बिजली संयंत्रों और उर्वरक उद्योग की लागत बढ़ सकती है, जिसका असर आम उपभोक्ताओं तक पहुंच सकता है।
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वैश्विक बाजार में उथल-पुथल
कतर दुनिया के सबसे बड़े LNG निर्यातकों में से एक है। रास लफ़्फ़ान टर्मिनल से बड़े पैमाने पर निर्यात होता है। प्लांट बंद होने से एशिया और यूरोप के बाजारों में सप्लाई का संतुलन बिगड़ गया है। विश्लेषकों का मानना है कि अगर तनाव और बढ़ा तो कच्चे तेल के साथ-साथ गैस की कीमतें भी रिकॉर्ड स्तर छू सकती हैं।
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ऊर्जा सुरक्षा पर सवाल
विशेषज्ञों का कहना है कि यह घटनाक्रम भारत के लिए ऊर्जा स्रोतों के विविधीकरण की जरूरत को फिर से रेखांकित करता है। अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया और अफ्रीकी देशों से LNG आयात बढ़ाने के विकल्पों पर तेजी से विचार किया जा सकता है।
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फिलहाल सरकार स्थिति पर नजर बनाए हुए है और वैकल्पिक आपूर्ति सुनिश्चित करने के प्रयास किए जा रहे हैं।
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अगर पश्चिम एशिया में हालात नहीं सुधरे, तो आने वाले हफ्तों में गैस संकट और गहरा सकता है।




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