- फाइबर गैस सिलेंडर क्या है और कैसे अलग है?
- लोहे के सिलेंडर से कितना हल्का?
- ट्रैकिंग तकनीक से कैसे रुकेगी चोरी?
- सुरक्षा मानकों में क्या बदलाव?
न्यूज़ डेस्क
लखनऊ। उत्तर प्रदेश में घरेलू रसोई गैस उपभोक्ताओं के लिए बड़ी राहत की खबर है। जल्द ही राज्य में पारंपरिक लोहे के भारी-भरकम सिलेंडरों की जगह आधुनिक फाइबर (कम्पोजिट) गैस सिलेंडर उपलब्ध कराए जाएंगे। ये सिलेंडर वजन में लगभग आधे होंगे, पारदर्शी बॉडी के कारण गैस की मात्रा दिखाई देगी और इनमें उन्नत सुरक्षा तकनीक का इस्तेमाल किया जाएगा।
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आधा वजन, दोगुनी सुविधा
फाइबर गैस सिलेंडर पारंपरिक लोहे के सिलेंडर की तुलना में करीब 50 प्रतिशत तक हल्के होंगे। इससे खासतौर पर महिलाओं, बुजुर्गों और अपार्टमेंट में रहने वाले उपभोक्ताओं को सिलेंडर उठाने और बदलने में आसानी होगी।
पारदर्शी डिजाइन, गैस की जानकारी
इन सिलेंडरों की सबसे बड़ी खासियत यह है कि ये आंशिक रूप से पारदर्शी होंगे। उपभोक्ता आसानी से देख सकेंगे कि सिलेंडर में कितनी गैस बची है। इससे अचानक गैस खत्म होने की समस्या से राहत मिलेगी।
ट्रैकिंग तकनीक से चोरी पर रोक
सरकार और गैस कंपनियां इन सिलेंडरों में क्यूआर कोड/आरएफआईडी आधारित ट्रैकिंग सिस्टम लागू करने की तैयारी में हैं। इससे हर सिलेंडर की मूवमेंट पर नजर रखी जा सकेगी। चोरी, कालाबाजारी और अवैध रिफिलिंग जैसी गतिविधियों पर अंकुश लगेगा।
विस्फोट की आशंका बेहद कम
फाइबर सिलेंडर विशेष कम्पोजिट सामग्री से बने होते हैं, जो जंग-रोधी और अधिक सुरक्षित मानी जाती है। इनमें आग लगने की स्थिति में भी दबाव धीरे-धीरे निकलता है, जिससे विस्फोट का खतरा काफी कम हो जाता है। सुरक्षा मानकों को ध्यान में रखते हुए इन्हें अंतरराष्ट्रीय प्रमाणन के तहत तैयार किया जाता है।
चरणबद्ध तरीके से होगा वितरण
सूत्रों के अनुसार, शुरुआत में बड़े शहरों—जैसे लखनऊ, कानपुर, वाराणसी और गाजियाबाद—में इन सिलेंडरों की आपूर्ति शुरू की जाएगी। इसके बाद धीरे-धीरे पूरे प्रदेश में विस्तार किया जाएगा। उपभोक्ताओं को अपने मौजूदा कनेक्शन के साथ विकल्प के रूप में फाइबर सिलेंडर चुनने की सुविधा मिल सकती है।
क्या कीमत में होगा अंतर?
संभावना है कि फाइबर सिलेंडर की शुरुआती लागत पारंपरिक सिलेंडर से थोड़ी अधिक हो सकती है, लेकिन लंबे समय में कम रखरखाव और बेहतर सुरक्षा के कारण यह उपभोक्ताओं के लिए लाभकारी साबित होगा।
सरकार का उद्देश्य
प्रदेश सरकार और तेल कंपनियों का कहना है कि इस पहल का मुख्य उद्देश्य उपभोक्ताओं की सुरक्षा बढ़ाना, गैस वितरण प्रणाली को पारदर्शी बनाना और आधुनिक तकनीक के जरिए सुविधा सुनिश्चित करना है।
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यदि यह योजना सफल रही तो यूपी देश के उन अग्रणी राज्यों में शामिल हो जाएगा जहां घरेलू रसोई गैस के क्षेत्र में आधुनिक और सुरक्षित विकल्प उपलब्ध होंगे।




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