- वर्दी वही, सितारे नकली… लेकिन सिस्टम को भनक तक नहीं लगी। एक हेड कांस्टेबल ने खुद को दरोगा बना लिया और सालों तक पुलिस महकमे को आईना दिखाता रहा।
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कानपुर:
कहते हैं आत्मविश्वास हो तो इंसान बड़ी से बड़ी मंज़िल हासिल कर लेता है, लेकिन कानपुर पुलिस में एक हेड कांस्टेबल ने आत्मविश्वास की ऐसी मिसाल पेश कर दी कि उसने खुद को ही दरोगा (सब इंस्पेक्टर) बना लिया। हैरानी की बात यह है कि यह ‘स्वयंभू दरोगा’ करीब चार साल तक विभाग की आंखों में धूल झोंकता रहा और किसी बड़े अधिकारी को इसकी भनक तक नहीं लगी।
मामला हेड कांस्टेबल दयाशंकर वर्मा का है, जो मूल रूप से उरई के रहने वाले बताए जा रहे हैं। वह 1981 बैच के सिपाही हैं और कुछ समय पहले तक कानपुर कमिश्नरी के नजीराबाद थाने में तैनात रहे। फिलहाल उनकी तैनाती पुलिस लाइन में है।
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खुद ही लिख लिया पद – बन गए दरोगा
सूत्रों के मुताबिक मार्च-अप्रैल 2018 में दयाशंकर की तैनाती घाटमपुर थाने में थी। उसी दौरान उन्होंने किसी मामले में उच्च अधिकारियों को एक प्रार्थना पत्र दिया, जिसमें अपने पद के आगे “दरोगा” लिख दिया।
बताया जा रहा है कि उसी दस्तावेज के आधार पर आगे विभागीय फाइलों और कागज़ों में भी उनका पद सब इंस्पेक्टर दर्ज होता चला गया। हैरानी की बात यह रही कि किसी भी स्तर पर इसे चेक नहीं किया गया।
तबादलों में भी ‘दरोगा’ ही बने रहे
फर्जी तरीके से दरोगा बने दयाशंकर का नाम बाद में दरोगाओं के तबादले की सूची में भी शामिल हो गया। इसके बाद उनकी पोस्टिंग चौबेपुर थाने में कर दी गई।
यह सिलसिला यहीं नहीं रुका। थाने बदलते गए, लेकिन दयाशंकर का पद दरोगा ही बना रहा। इतना ही नहीं, उन्हें कई जगह चौकी प्रभारी की जिम्मेदारी भी मिल गई।
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150 विवेचनाएं भी निपटा दीं
सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि इस दौरान दयाशंकर वर्मा ने करीब 150 मामलों की विवेचना भी कर डाली। जिन फाइलों को छूने का अधिकार उनके पास नहीं था, उन पर भी उन्होंने पूरी ‘दरोगा स्टाइल’ में कार्रवाई की।
अब सवाल उठ रहा है कि इन विवेचनाओं के आधार पर कितने लोगों को जेल भेजा गया और कितनों के मामलों में फैसले हुए।
चार साल तक सिस्टम सोता रहा
सबसे बड़ा सवाल पुलिस विभाग पर खड़ा हो रहा है।
चार साल तक अफसर बदलते रहे, तबादले होते रहे, लेकिन किसी को भी इस फर्जीवाड़े की भनक नहीं लगी।
अब विभागीय स्तर पर यह जांच का विषय बन गया है कि
• यह सिर्फ लापरवाही थी
• या फिर किसी की मिलीभगत से यह खेल चलता रहा।
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अब कई मामलों की जांच
फिलहाल दयाशंकर वर्मा के खिलाफ कई मामलों की जांच चल रही है। विभागीय रिकॉर्ड में उनका पद एचसीपी (हेड कांस्टेबल प्रमोटी) है, लेकिन कागज़ों में वह 2018 से दरोगा बने हुए थे।
इस पूरे मामले ने पुलिस विभाग की कार्यप्रणाली और निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।




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