दरोगा भर्ती परीक्षा के प्रश्न पर बवाल: ‘पंडित’ शब्द को लेकर वाराणसी में एफआईआर की मांग

Picture of nationstationnews

nationstationnews

 

 

  • हिंदी प्रश्नपत्र में ‘अवसरवादी’ के विकल्प में ‘पंडित’ शब्द शामिल होने पर भड़का विरोध, थाना कैंट में सौंपा गया प्रार्थना पत्र

मिडिल ईस्ट तनाव का असर: CBSE ने 7 देशों में 12वीं बोर्ड परीक्षाएं रद्द कीं

वाराणसी:

उत्तर प्रदेश में आयोजित दरोगा भर्ती परीक्षा के एक प्रश्न को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। हिंदी प्रश्नपत्र में “पंडित” शब्द को कथित तौर पर आपत्तिजनक संदर्भ में शामिल किए जाने के विरोध में रविवार को समाज के लोगों का एक प्रतिनिधिमंडल थाना कैंट, वाराणसी पहुंचा और मामले में मुकदमा दर्ज करने की मांग की।

प्रतिनिधिमंडल ने थाना अध्यक्ष को सौंपे गए विस्तृत प्रार्थना पत्र में बताया कि 14 मार्च 2026 को आयोजित दरोगा (Sub-Inspector) भर्ती परीक्षा के हिंदी प्रश्नपत्र में “अवसरवादी” शब्द के विकल्पों में “पंडित” शब्द का प्रयोग किया गया था। इस पर समाज के लोगों ने कड़ा ऐतराज जताते हुए इसे एक सम्मानित शब्द का अपमान बताया।

पांच राज्यों में चुनावी रणभेरी: पश्चिम बंगाल दो चरणों में, अन्य राज्यों में एक चरण में मतदान

प्रतिनिधिमंडल का कहना है कि “पंडित” शब्द भारतीय परंपरा में विद्वता, ज्ञान और ब्राह्मण समाज की प्रतिष्ठा का प्रतीक माना जाता है। ऐसे सम्मानसूचक शब्द को नकारात्मक अर्थ वाले विकल्प के रूप में प्रस्तुत करना न केवल अनुचित है, बल्कि इससे समाज के एक बड़े वर्ग की भावनाएं भी आहत हुई हैं।

यूपी में 7 IAS अफसरों के तबादले, प्रकाश बिंदु बने गृह सचिव

ज्ञापन में यह भी कहा गया कि उत्तर प्रदेश पुलिस भर्ती एवं प्रोन्नति बोर्ड द्वारा आयोजित यह परीक्षा प्रदेश की सबसे महत्वपूर्ण भर्ती परीक्षाओं में शामिल है, जिसमें लाखों अभ्यर्थी भाग लेते हैं। ऐसी परीक्षाओं के प्रश्नपत्र आमतौर पर विषय विशेषज्ञों द्वारा तैयार किए जाते हैं और मॉडरेशन समिति की कई स्तर की जांच के बाद ही अंतिम रूप दिया जाता है। इसके बावजूद इस प्रकार का प्रश्न शामिल होना गंभीर लापरवाही या संभावित दुर्भावना की ओर इशारा करता है।

प्रतिनिधिमंडल ने मांग की है कि पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कराई जाए और यदि लापरवाही सामने आती है तो प्रश्नपत्र तैयार करने वाले विषय विशेषज्ञों, मॉडरेशन समिति के सदस्यों तथा परीक्षा आयोजन से जुड़े जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ विधिक कार्रवाई की जाए।

साथ ही चेतावनी दी गई कि यदि समय रहते उचित कार्रवाई नहीं हुई तो समाज के लोग उच्च पुलिस अधिकारियों और सक्षम न्यायालय का दरवाजा खटखटाने को मजबूर होंगे।

थाना कैंट पहुंचकर ज्ञापन सौंपने वालों में शशांक शेखर त्रिपाठी, राजेश कुमार त्रिवेदी, संतोषी शुक्ला, अरुण कुमार मिश्रा, आशुतोष शुक्ला, नीरज चौबे (सोनू), उपेंद्र निगम, शिवेंद्र कुमार दुबे, मनोज कुमार तिवारी, करण सिंह और राज शेखर त्रिपाठी समेत कई लोग मौजूद रहे।

Our Visitor

1 0 7 9 0 7
Total Users : 107907
Total views : 131089