राजधानी में हर दिन 54 लोग गायब, महिलाओं और नाबालिगों की संख्या सबसे ज्यादा

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  • राजधानी में हर दिन 54 लोग लापता, सबसे ज़्यादा महिलाएं और नाबालिग
  • दिल्ली में गुमनाम होते लोग: 15 दिनों में 807 लापता, 572 अब भी गायब

न्यूज़ डेस्क 

नई दिल्ली। देश की राजधानी दिल्ली एक बार फिर डरावने आंकड़ों के कारण सवालों के घेरे में है। नए साल के पहले महज़ 15 दिनों में 807 लोग लापता हो गए। इनमें से 572 लोगों का अब तक कोई सुराग नहीं लग पाया है। यह आंकड़े न सिर्फ चौंकाने वाले हैं, बल्कि राजधानी की सुरक्षा व्यवस्था पर भी गंभीर प्रश्न खड़े करते हैं।

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लापता लोगों में महिलाएं सबसे ज्यादा

दिल्ली पुलिस के आंकड़ों के मुताबिक, इन 807 लापता लोगों में

  • 509 लड़कियां और महिलाएं
  • 298 पुरुष शामिल हैं।

यानी कुल मामलों में लगभग दो-तिहाई महिलाएं और लड़कियां हैं। इनमें से अब तक केवल 235 लोगों को ढूंढा जा सका, जबकि बाकी लोग मानो शहर की भीड़ में गुम हो गए हों।

नाबालिगों की गुमशुदगी सबसे बड़ा खतरा

सबसे चिंताजनक बात यह है कि लापता लोगों में 191 नाबालिग शामिल हैं।

  • इनमें से सिर्फ 181 मामलों में ट्रेसिंग हुई,
  • जबकि 435 लोग अब भी अंधेरे में हैं।

15 दिनों में 146 नाबालिग लड़कियां लापता हुईं, यानी औसतन हर दिन 13 बच्चे गायब।

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टीनएजर्स पर सबसे बड़ा संकट

नए साल के पहले पखवाड़े में

  • 12 से 18 साल के 169 किशोर-किशोरियां लापता हुए।
  • इनमें 138 लड़कियां और 31 लड़के शामिल हैं।

पुलिस अब तक केवल 48 बच्चों को ढूंढ पाई, जबकि 121 बच्चे यानी 71% अब भी लापता हैं।

2025 के आंकड़े और भी डराने वाले

साल 2025 में राजधानी से

  • 24,508 लोग लापता हुए,
  • जिनमें 14,870 महिलाएं (60%) थीं।

हालांकि 15,421 लोग मिल गए, लेकिन 9,087 लोगों का आज तक कोई सुराग नहीं मिला।

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2016 से 2026 के बीच दिल्ली से

  • 2,32,737 लोग लापता हुए।
  • इनमें से 52,000 लोगों का अब तक कोई पता नहीं चल पाया।

हर साल औसतन 5,000 टीनएजर्स लापता होते हैं, जिनमें 3,500 लड़कियां होती हैं।

साल 2025 में ही 3,970 लड़कियां गायब हुईं।

सवाल जो अब भी अनुत्तरित हैं

दिल्ली पुलिस का कहना है कि आंकड़ों में कोई असामान्य बढ़ोतरी नहीं हुई है, लेकिन सबसे बड़ा सवाल आज भी कायम है—

ये लोग आखिर जा कहां रहे हैं?

क्या यह मानव तस्करी है,

क्या यह सामाजिक असुरक्षा का नतीजा है,

या फिर सिस्टम की ढिलाई का परिणाम?

राजधानी में सुरक्षा पर बड़ा सवाल

हर लापता चेहरा सिर्फ एक संख्या नहीं, बल्कि एक परिवार की टूटी उम्मीद है। जब देश की राजधानी में सैकड़ों लोग बिना सुराग गायब हो रहे हों, तो यह सिर्फ पुलिस नहीं, बल्कि पूरे सिस्टम के लिए खतरे की घंटी है।

अब सवाल सिर्फ आंकड़ों का नहीं, जवाबदेही का है।

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