- साइबर ठगों का नया तरीका: कमीशन के नाम पर बैंक अकाउंट लेकर कर रहे करोड़ों की ठगी
- खाताधारक पर भी कानूनी कार्रवाई संभव
न्यूज़ डेस्क
लखनऊ। आसान कमाई और कमीशन का झांसा देकर साइबर अपराधी आम लोगों को अपने जाल में फंसा रहे हैं। कुछ सौ या हजार रुपये के लालच में लोग अपना बैंक अकाउंट, डेबिट कार्ड या इंटरनेट बैंकिंग डिटेल्स साझा कर देते हैं — और यही छोटी सी गलती उन्हें बड़े कानूनी संकट में डाल सकती है।
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कैसे काम करता है गैंग?
साइबर ठग पहले सोशल मीडिया या मैसेज के जरिए संपर्क करते हैं। फिर कहते हैं कि “बस आपके अकाउंट से पैसा ट्रांसफर होगा, आपको कमीशन मिलेगा।”
असल में ये अकाउंट ठगी से वसूली गई रकम को छिपाने और आगे ट्रांसफर करने के लिए इस्तेमाल होते हैं। ऐसे खातों को ‘म्यूल अकाउंट’ के रूप में प्रयोग किया जाता है, जिससे असली अपराधी जांच से बच सकें।
खतरा कितना बड़ा?
- जिस खाते से अवैध लेन-देन होगा, कानूनी जवाबदेही उसी खाताधारक की होगी
- पुलिस जांच, बैंक फ्रीज और कोर्ट-कचहरी के चक्कर
- भविष्य में लोन, नौकरी और सरकारी सेवाओं पर भी असर
याद रखें — आपका बैंक अकाउंट आपकी वित्तीय और कानूनी पहचान है। इसे किसी और के हवाले करना सीधे तौर पर साइबर अपराध को बढ़ावा देना है।
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क्या करें, क्या न करें?
- अपना बैंक अकाउंट, डेबिट कार्ड, OTP या इंटरनेट बैंकिंग विवरण किसी के साथ साझा न करें
- अनजान कॉल, मैसेज या सोशल मीडिया ऑफर से सावधान रहें
- लालच भरे ऑफर को तुरंत ठुकराएं
शिकायत कहां करें?
अगर आपके साथ या आपके आसपास किसी के साथ ऐसा प्रयास हुआ है, तो तुरंत शिकायत दर्ज कराएं:
हेल्पलाइन नंबर: 1930
आधिकारिक पोर्टल: www.cybercrime.gov.in
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