- रोडवेज बस में 15 यात्री बिना टिकट, मुख्यालय की चेकिंग में सामने आई बड़ी लापरवाही
- UP 78 LT 5178 में 62 यात्री सवार थे, जांच में 15 बेटिकट मिले; टिकट व्यवस्था और निगरानी पर उठे गंभीर सवाल
उत्तर प्रदेश रोडवेज की बसों में टिकट व्यवस्था को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। मुख्यालय प्रवर्तन दल द्वारा की गई चेकिंग में एक ही बस में 15 यात्री बिना टिकट पकड़े गए। निरीक्षण रिपोर्ट के मुताबिक बस में कुल 62 यात्री सवार थे और इनमें 15 यात्री बिना टिकट यात्रा करते पाए गए।
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बस संख्या UP 78 LT 5178 इस बस के चालक हरविंद कुमार और परिचालक मनोज कुमार गुप्ता बताए गए हैं। एक ही बस में इतनी बड़ी संख्या में यात्रियों के बिना टिकट पकड़े जाने के बाद अब चालक-परिचालक की भूमिका के साथ-साथ पूरी निगरानी व्यवस्था पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।
मामला इसलिए गंभीर है क्योंकि यह कोई एक-दो यात्रियों के टिकट न लेने की बात नहीं है। एक ही बस में 15 यात्रियों का बिना टिकट मिलना रोडवेज की पूरी टिकट व्यवस्था और निगरानी तंत्र पर सवाल खड़ा करता है।
अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर इतनी बड़ी संख्या में यात्री बिना टिकट बस में कैसे सफर करते रहे?
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अगर रास्ते में नियमित चेकिंग होती है, अगर परिचालक द्वारा यात्रियों के टिकट की लगातार जांच की जाती है और अगर डिपो स्तर पर टिकट व्यवस्था की निगरानी होती है, तो फिर 15 यात्री बिना टिकट बस में सवार होकर चलते कैसे रहे?
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क्या यह महज लापरवाही थी?
क्या टिकट जारी करने की व्यवस्था में गंभीर चूक हुई?
या फिर इस पूरे खेल के पीछे किसी की मिलीभगत अथवा संरक्षण है?
यह सवाल इसलिए भी अहम है क्योंकि इस मामले को मुख्यालय की प्रवर्तन टीम ने पकड़कर सामने रखा है। यानी जब विभाग की अपनी ही प्रवर्तन टीम मौके पर पहुंची, तभी बस के अंदर चल रही टिकट व्यवस्था की असल तस्वीर सामने आई।
अब सवाल उन जिम्मेदार अधिकारियों से भी होना चाहिए, जिनके क्षेत्र से यह बस गुजर रही थी। क्या स्थानीय स्तर पर चेकिंग व्यवस्था सिर्फ कागजों में चल रही है? क्या डिपो और क्षेत्रीय अधिकारियों को बसों में टिकट व्यवस्था की वास्तविक स्थिति की जानकारी नहीं है?
और अगर जानकारी थी तो कार्रवाई क्यों नहीं हुई?https://www.facebook.com/share/r/14jwLyHHMXk/
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एक बस में 15 बिना टिकट यात्रियों का पकड़ा जाना केवल राजस्व का मामला नहीं है। यह विभागीय अनुशासन और जिम्मेदारी का भी सवाल है। रोडवेज की बस में सफर करने वाले हर यात्री से किराया लेना और उसके बदले टिकट जारी करना परिचालन व्यवस्था का मूल हिस्सा है। ऐसे में बड़ी संख्या में यात्रियों का बिना टिकट मिलना सामान्य घटना बताकर टाला नहीं जा सकता।
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सबसे बड़ा सवाल यही है—अगर मुख्यालय प्रवर्तन दल की चेकिंग नहीं होती तो क्या ये 15 यात्री बिना टिकट अपनी यात्रा पूरी कर लेते?
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और अगर जवाब हां है, तो फिर सवाल और गंभीर हो जाता है—आखिर रोडवेज को इतनी बड़ी चपत लगाने वाला यह खेल किसकी शह पर चल रहा है?
क्योंकि मुख्यालय की प्रवर्तन टीम ने बस की चेकिंग कर दी, बिना टिकट यात्रियों को पकड़ भी लिया। लेकिन असली कार्रवाई तो तब मानी जाएगी, जब विभाग इस सवाल का जवाब देगा कि एक बस में इतनी बड़ी संख्या में बिना टिकट यात्री आखिर सिस्टम की नजरों से बचकर चल कैसे रहे थे?
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चेकिंग ने पोल खोल दी है। अब जिम्मेदारी तय करने की बारी रोडवेज मुख्यालय की है।
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कुछ दिन पहले रोडवेज के बदायूं डिपो की एक और बड़ी गड़बड़ी का खुलासा हुआ था, जिसमें 38 यात्री बिना टिकट पकड़े गए थे।
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एक ही बस में इतनी बड़ी संख्या में बेटिकट यात्री मिलने के बाद टिकट व्यवस्था और नियमित निगरानी पर फिर गंभीर सवाल खड़े हुए हैं।https://www.facebook.com/share/v/18z8CuTM2N/
आखिर 38 यात्री बिना टिकट बस में कैसे सफर करते रहे? क्या यह सिर्फ लापरवाही है या रोडवेज की निगरानी व्यवस्था में कोई बड़ी कमी?





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