- UPI चार्ज पर सरकार का बड़ा अपडेट, आम यूजर को अभी नहीं देना होगा शुल्क
- राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद MDR का रास्ता साफ, कारोबारी लेनदेन पर हो सकता है असर
नई दिल्ली। यूपीआई और रुपे कार्ड से होने वाले डिजिटल भुगतान को लेकर बड़ा कानूनी बदलाव हुआ है। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने कराधान एवं अन्य कानून (संशोधन) अधिनियम, 2026 और भुगतान एवं निपटान प्रणाली अधिनियम, 2007 में संशोधन से जुड़े विधेयकों को मंजूरी दे दी है। संसद ने इन विधेयकों को 10 अगस्त को पारित किया था। राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद अब संशोधनों के लागू होने का रास्ता साफ हो गया है।
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भुगतान एवं निपटान प्रणाली अधिनियम में संशोधन के जरिए सरकार को इलेक्ट्रॉनिक भुगतान माध्यमों और लेनदेन पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) से जुड़े नियम तय करने का कानूनी आधार मिलेगा। इसके तहत सरकार अधिसूचना जारी कर यह निर्धारित कर सकेगी कि किन डिजिटल भुगतान माध्यमों या किस तरह के लेनदेन पर MDR लागू होगा और किन्हें इससे छूट दी जाएगी।
आम यूजर को नहीं देना होगा UPI चार्ज
इस बदलाव के बाद UPI इस्तेमाल करने वाले आम ग्राहकों के बीच शुल्क को लेकर चिंता बढ़ सकती है, लेकिन वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने संसद में चर्चा के दौरान स्पष्ट किया था कि यूजर के लिए UPI भुगतान नि:शुल्क बना रहेगा। संभावित MDR को कुछ निश्चित श्रेणियों के कारोबारी लेनदेन तक सीमित रखने की बात कही गई थी।
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फिलहाल UPI और रुपे डेबिट कार्ड से भुगतान पर बैंक और भुगतान प्रणाली प्रदाता यूजर से शुल्क नहीं ले सकते। संशोधन के बाद शुल्क व्यवस्था को लेकर नियम तय करने की प्रक्रिया को कानूनी आधार मिलेगा।
अब किसकी होगी भूमिका?
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UPI से जुड़े MDR शुल्क और भुगतान व्यवस्था पर निर्णय लेने में NPCI की अध्यक्षता वाली UPI एवं सेवा संचालन समिति की भूमिका महत्वपूर्ण होगी। हालांकि, राष्ट्रपति की मंजूरी का मतलब यह नहीं है कि अब हर UPI भुगतान पर तत्काल शुल्क लगना शुरू हो जाएगा। शुल्क की वास्तविक दर, श्रेणी और लागू होने की शर्तें अलग से तय की जानी होंगी।
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यानी फिलहाल आम ग्राहक के लिए UPI मुफ्त है, लेकिन भविष्य में कुछ कारोबारी लेनदेन पर MDR लागू करने का रास्ता कानूनी रूप से खुल गया है।





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