नीतीश कुमार जाएंगे राज्यसभा? बिहार में सीएम की कुर्सी पर तीन दिग्गज आमने-सामने
- बिहार की सियासत में बड़ा ट्विस्ट: नीतीश दिल्ली रवाना, उत्तराधिकारी की दौड़ में 3 नाम सबसे आगे
- क्या बदलने वाला है बिहार का नेतृत्व? नीतीश के दिल्ली जाने की अटकलों से सियासी हलचल
- सीएम पद पर सस्पेंस गहराया: नीतीश के राज्यसभा जाने की चर्चा, 3 चेहरों पर सबकी नजर
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पटना/दिल्ली। बिहार की राजनीति एक बार फिर करवट लेने की तैयारी में है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने की अटकलों ने सत्ता के गलियारों में हलचल मचा दी है। सूत्रों के अनुसार, वे जल्द ही दिल्ली का रुख कर सकते हैं और केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah की मौजूदगी में राज्यसभा के लिए नामांकन दाखिल करने की चर्चा है।
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हालांकि आधिकारिक पुष्टि अभी तक नहीं हुई है, लेकिन सत्ताधारी गठबंधन के भीतर नए मुख्यमंत्री को लेकर मंथन तेज हो गया है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अगर नीतीश कुमार दिल्ली की राजनीति में सक्रिय भूमिका लेते हैं, तो बिहार में नेतृत्व परिवर्तन लगभग तय माना जा रहा है।
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अगले सीएम की रेस में ये 3 नाम सबसे आगे
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Samrat Choudhary वर्तमान में बिहार सरकार में उपमुख्यमंत्री की भूमिका निभा रहे सम्राट चौधरी भाजपा के मजबूत ओबीसी चेहरे माने जाते हैं। संगठन पर उनकी पकड़ और केंद्र नेतृत्व से नजदीकी उन्हें सबसे मजबूत दावेदार बनाती है।
Vijay Kumar Sinha विधानसभा अध्यक्ष रह चुके विजय कुमार सिन्हा भी मुख्यमंत्री पद की दौड़ में माने जा रहे हैं। वे लंबे समय से भाजपा के सक्रिय और मुखर नेताओं में शामिल हैं। सवर्ण वोट बैंक में उनकी पकड़ मजबूत मानी जाती है।
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Lalan Singh जेडीयू के वरिष्ठ नेता ललन सिंह भी संभावित नामों में शामिल हैं। अगर गठबंधन समीकरण को संतुलित रखने की रणनीति अपनाई जाती है, तो जेडीयू से किसी चेहरे को आगे लाया जा सकता है।
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क्यों उठ रही हैं अटकलें?
- • हाल के दिनों में दिल्ली में लगातार बैठकों का दौर
- • राष्ट्रीय राजनीति में संभावित नई भूमिका की चर्चा
- • 2026 विधानसभा चुनाव से पहले नया चेहरा पेश करने की रणनीति
- • केंद्र और राज्य में तालमेल मजबूत करने की कोशिश
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यह बदलाव 2029 लोकसभा चुनाव की तैयारी का हिस्सा भी हो सकता है।
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क्या कहते हैं राजनीतिक समीकरण?
बिहार में भाजपा-जेडीयू गठबंधन की सरकार है। ऐसे में नया मुख्यमंत्री किस दल से होगा, यह पूरी तरह से केंद्रीय नेतृत्व के फैसले पर निर्भर करेगा। अगर भाजपा नेतृत्व बदलाव चाहता है




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