खामेनेई की मौत पर चुप्पी, खाड़ी से लगातार संवाद… पश्चिम एशिया को लेकर भारत की क्या है कूटनीति?

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  •  . खामेनेई पर चुप्पी, शांति की अपील
  •  . ईरान-इजरायल संघर्ष पर भारत की संतुलित प्रतिक्रिया
  •  . खाड़ी देशों से बढ़ा कूटनीतिक संवाद
  •  . रणनीतिक साझेदारी बनाम क्षेत्रीय स्थिरता
  •  . ऊर्जा, प्रवासी और सुरक्षा—भारत की तीन बड़ी चिंताएं

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नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान पर लगातार हमलों की खबरों ने वैश्विक राजनीति को गरमा दिया है। इस बीच ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई को लेकर उठ रही अटकलों पर भारत ने आधिकारिक रूप से कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है। हालांकि नई दिल्ली ने ईरान-इजरायल संघर्ष पर “गहरी चिंता” व्यक्त करते हुए संयम और कूटनीतिक समाधान की अपील की है।

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संतुलन की रणनीति: ‘टॉक टू ऑल’ पॉलिसी

भारत की पश्चिम एशिया नीति लंबे समय से “संतुलन और संवाद” पर आधारित रही है। भारत के संबंध एक तरफ इजरायल से रक्षा और तकनीक के क्षेत्र में मजबूत हैं, तो दूसरी ओर ईरान के साथ ऊर्जा, कनेक्टिविटी और क्षेत्रीय स्थिरता के मुद्दों पर सहयोग जारी है।

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भारत की प्राथमिकता है कि वह किसी भी ध्रुवीकरण का हिस्सा बनने से बचे और सभी पक्षों से संवाद बनाए रखे। विदेश मंत्रालय ने साफ किया है कि क्षेत्रीय शांति और स्थिरता भारत के हित में है।

 

खाड़ी देशों से लगातार संपर्क

सूत्रों के मुताबिक, भारत ने हाल के दिनों में सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात और कतर सहित कई खाड़ी देशों से उच्च स्तरीय संपर्क बनाए रखा है। खाड़ी क्षेत्र भारत के लिए सिर्फ ऊर्जा आपूर्ति का स्रोत नहीं, बल्कि वहां बसे करीब 80 लाख भारतीयों की सुरक्षा का भी सवाल है।

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भारत का उद्देश्य है कि क्षेत्रीय संघर्ष का असर तेल आपूर्ति, समुद्री व्यापार मार्गों और प्रवासी भारतीयों की सुरक्षा पर न पड़े।

 

अमेरिका और इजरायल से रणनीतिक साझेदारी

भारत के अमेरिका और इजरायल से भी मजबूत रणनीतिक संबंध हैं। अमेरिका के साथ रक्षा और तकनीकी साझेदारी लगातार गहरी हुई है, जबकि इजरायल भारत को उन्नत रक्षा उपकरण और खुफिया सहयोग प्रदान करता है। ऐसे में भारत की कोशिश है कि वह अपने दीर्घकालिक हितों को ध्यान में रखते हुए किसी पक्ष के खिलाफ सीधी टिप्पणी से बचे।

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ईरान से ऊर्जा और कनेक्टिविटी हित

ईरान भारत के लिए ऊर्जा सुरक्षा के लिहाज से अहम रहा है। इसके अलावा चाबहार पोर्ट परियोजना भारत की मध्य एशिया तक पहुंच की रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा है। ऐसे में नई दिल्ली नहीं चाहती कि संबंधों में अनावश्यक तनाव पैदा हो।

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स्ट्रेटेजिक ऑटोनॉमी’ की नीति

विशेषज्ञों का मानना है कि भारत की विदेश नीति “रणनीतिक स्वायत्तता” पर आधारित है। भारत न तो पश्चिमी गुट का पूर्ण समर्थन करता है, न ही किसी एक धड़े के साथ खुलकर खड़ा होता है। उसकी प्राथमिकता है – संवाद, स्थिरता और अपने राष्ट्रीय हितों की सुरक्षा।

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आगे की राह

पश्चिम एशिया में हालात जिस तेजी से बदल रहे हैं, भारत की कूटनीति की परीक्षा भी उतनी ही कठिन होती जा रही है। खामेनेई को लेकर उठ रहे सवालों पर भारत की चुप्पी दरअसल सावधानी भरी रणनीति का हिस्सा मानी जा रही है।

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नई दिल्ली का स्पष्ट संदेश है – क्षेत्र में तनाव कम हो, बातचीत के जरिए समाधान निकले और भारतीय हित सुरक्षित रहें। आने वाले दिनों में हालात किस दिशा में जाते हैं, इस पर भारत की सक्रिय कूटनीति की भूमिका अहम रहेगी।

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