- अमेरिका-इजराइल हमलों के बाद ईरान में नेतृत्व बदलाव, वरिष्ठ धर्मगुरु को सौंपी गई अहम जिम्मेदारी
- खामेनेई की मौत की खबरों के बीच सत्ता संतुलन साधने में जुटा तेहरान
- लीडरशिप काउंसिल में नई नियुक्ति से राजनीतिक हलचल तेज
- मिडिल ईस्ट में बढ़ा तनाव, ईरान ने तुरंत भरी नेतृत्व की खाली जगह
नई दिल्ली।
अमेरिका और इजराइल के हमलों में ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत की खबरों के बीच ईरान की सत्ता व्यवस्था में बड़ा बदलाव सामने आया है। सरकारी मीडिया के अनुसार, वरिष्ठ ईरानी धर्मगुरु अलीरेजा अराफी को रविवार को देश की लीडरशिप काउंसिल में ज्यूरिस्ट सदस्य (फकीह) के रूप में नियुक्त किया गया है।
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ईरानी सरकारी प्रसारण संस्थान Islamic Republic of Iran Broadcasting के मुताबिक, यह नियुक्ति मौजूदा हालात को देखते हुए की गई है, ताकि देश की राजनीतिक और धार्मिक नेतृत्व व्यवस्था को स्थिर रखा जा सके। अराफी को ईरान के प्रभावशाली धार्मिक नेताओं में गिना जाता है और वे पहले भी कई अहम धार्मिक और प्रशासनिक पदों पर रह चुके हैं।
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गौरतलब है कि अयातुल्ला Ali Khamenei ईरान की राजनीति और धार्मिक व्यवस्था के सर्वोच्च पद पर थे। उनकी मौत की खबरों के बाद देश और पश्चिम एशिया की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। हालांकि, इन हमलों और मौत की परिस्थितियों को लेकर अभी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अलग-अलग दावे किए जा रहे हैं।
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विशेषज्ञों का मानना है कि लीडरशिप काउंसिल में नई नियुक्ति से यह संकेत मिलता है कि ईरान की व्यवस्था किसी भी राजनीतिक खालीपन को लंबा नहीं खींचना चाहती। आने वाले दिनों में क्षेत्रीय तनाव और कूटनीतिक गतिविधियां और तेज हो सकती हैं।




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