- होली से पहले परिवहन निगम में भेदभाव का आरोप!
- नियमित कर्मचारियों को एरियर से एडवांस, संविदा कर्मियों को सिर्फ आश्वासन?
लखनऊ।
उत्तर प्रदेश राज्य सड़क परिवहन निगम मुख्यालय,लखनऊ से जारी आदेश ने निगम के भीतर एक नई बहस छेड़ दी है। होली 2026 से पहले कर्मचारियों को अग्रिम भुगतान के संबंध में जारी निर्देशों में नियमित (नियमित/पूर्णकालिक) और संविदा कर्मियों के बीच कथित भेदभाव का आरोप लग रहा है।
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आदेश के अनुसार, नियमित/पूर्णकालिक कार्यरत कर्मचारियों को महंगाई भत्ते की एरियर किस्तों के समायोजन के आधार पर ₹5,000 तक का अग्रिम भुगतान किए जाने की व्यवस्था की गई है। यह भुगतान आगामी देय एरियर से समायोजित किया जाएगा।
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लेकिन सवाल यह उठ रहा है कि संविदा कर्मियों के लिए ऐसी कोई स्पष्ट आर्थिक राहत का प्रावधान क्यों नहीं किया गया?
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नियमित बनाम संविदा: दोहरा मापदंड?
नियमित कर्मचारियों को जहां एरियर की किस्तों से एडवांस देने का रास्ता खोला गया है, वहीं संविदा कर्मियों को न तो एरियर मिलता है और न ही समान अग्रिम भुगतान की सुविधा। त्योहार के समय जब सभी कर्मचारियों की आर्थिक जरूरतें समान होती हैं, तब भुगतान नीति में यह अंतर कई सवाल खड़े कर रहा है।
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संविदा कर्मचारियों का कहना है कि वे भी वर्षों से निगम की सेवाओं में लगे हैं, लेकिन हर बार राहत योजनाओं में उन्हें पीछे छोड़ दिया जाता है।
- आदेश में क्या कहा गया?
• होली 2026 से पूर्व नियमित/पूर्णकालिक कर्मियों को ₹5,000 तक अग्रिम भुगतान।
• महंगाई भत्ते की स्वीकृत एरियर राशि से समायोजन।
• भुगतान सुनिश्चित करने के लिए इकाइयों को निर्देश जारी।
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- संविदा कर्मियों का सवाल
• क्या संविदा कर्मचारी त्योहार नहीं मनाते?
• क्या उनकी आर्थिक जरूरतें कम हैं?
• समान कार्य के बावजूद भुगतान में असमानता क्यों?
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निगम के इस आदेश के बाद कर्मचारी संगठनों में नाराजगी देखी जा रही है। मांग उठ रही है कि संविदा कर्मियों को भी समान आधार पर अग्रिम भुगतान या विशेष आर्थिक सहायता दी जाए।
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त्योहार से पहले राहत देने की मंशा सराहनीय है, लेकिन अगर नीति में समानता न हो तो यह राहत भी विवाद का कारण बन जाती है। अब देखना यह है कि निगम प्रबंधन इस असंतोष पर क्या रुख अपनाता है।




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