- 29 जनवरी को लापता बैग, 9 फरवरी को FIR और फिर “आलमारी के नीचे” बरामदगी
- कर्मचारियों ने उठाए कूट रचना के आरोप
न्यूज़ डेस्क
अमेठी। उत्तर प्रदेश राज्य सड़क परिवहन निगम के अमेठी डिपो में टिकट बैग के गायब होने और दो सप्ताह बाद उसी बैग के डिपो परिसर में “बरामद” होने की घटना ने कर्मचारियों के बीच गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। सवाल यह है कि यदि टिकट 29 जनवरी को ग़ायब हुए तो बिना बैग जमा किए परिचालक ड्यूटी कैसे करती रही। और यदि बैग रूम से टिकट गायब हुए थे तो परिचालक से एफआईआर दर्ज क्यो करवाई गई ।
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कर्मचारियों का दावा है कि 29 जनवरी को टिकट बैग गायब होने की सूचना दी गई, लेकिन 9 फरवरी को—कथित तौर पर समझौता विफल होने के बाद—FIR दर्ज कराई गई। सबसे चौंकाने वाली बात यह बताई जा रही है कि बाद में वही टिकट बैग डिपो के बैग-रूम में आलमारी के नीचे मिला।
“क्या पूरे महीने सफाई नहीं हुई?”
कर्मचारियों का सवाल है—अगर बैग उसी कक्ष में पड़ा था, तो क्या सफाई कर्मियों ने पूरे महीने सफाई नहीं की? क्या दो सप्ताह बाद FIR और फिर उसी स्थान पर बरामदगी संयोग है या किसी कूट रचना का हिस्सा?
डिपो के कुछ कर्मचारियों ने नाम न छापने की शर्त पर कहा कि पहले भी डिपो में “समझौते के दबाव” की शिकायतें समाचार पत्रों और सोशल मीडिया पर उठती रही हैं। उनका आरोप है कि कर्मचारियों को कथित रूप से कागज़ी कार्रवाई और अनुशासनात्मक कार्यवाही के भय से समझौते के लिए मजबूर किया जाता है।
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उच्च प्रबंधन पर भी उठे सवाल
मामले में कर्मचारियों का यह भी कहना है कि उच्च प्रबंधन तक शिकायतें पहुंचने के बावजूद ठोस कार्रवाई नहीं हुई। आरोप है कि “ऊपर तक सब जानकारी होने के बाद भी कोई जांच नहीं बैठाई गई”, जिससे संदेह और गहरा हो गया है।
जांच की मांग
कर्मचारियों ने निष्पक्ष जांच और CCTV फुटेज की सार्वजनिक समीक्षा की मांग की है, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि टिकट बैग वास्तव में कैसे और कब गायब हुआ तथा बरामदगी की परिस्थितियां क्या थीं।
फिलहाल डिपो प्रबंधन की ओर से आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं मिल सकी है। यदि प्रबंधन पक्ष अपनी सफाई देता है, तो उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।
(नोट: यह खबर कर्मचारियों द्वारा लगाए गए आरोपों और उपलब्ध जानकारी पर आधारित है। स्वतंत्र जांच के बाद ही तथ्यों की अंतिम पुष्टि संभव होगी।)




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