- “न्याय के नाम पर सौदा! बलात्कार केस में फाइनल रिपोर्ट लगाने के लिए 75 हजार की रिश्वत लेते पकड़ा गया थाना प्रभारी”
- शिकायत के बाद टीम ने ट्रैप बिछाया, ऑफिस में ही हुई कार्रवाई
- थाना प्रभारी की गिरफ्तारी से विभाग में हड़कंप
न्यूज़ डेस्क
प्रयागराज :कानून की रक्षा की शपथ लेने वाला ही जब कानून का सौदागर बन जाए तो सवाल उठना लाजिमी है। प्रयागराज के बारा थाना प्रभारी विनोद कुमार सोनकर को एंटी करप्शन टीम ने 75 हजार रुपये की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों गिरफ्तार किया।
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आरोप है कि बलात्कार के एक मामले में फाइनल रिपोर्ट लगाने के नाम पर मोटी रकम मांगी गई। शिकायतकर्ता से कथित तौर पर ऑफिस में बैठकर पैसों की बातचीत हुई और “सेटिंग” के नाम पर दबाव बनाया गया। इतना ही नहीं, फर्जी मुकदमा दर्ज कराने की धमकी भी दी गई।
शिकायत मिलते ही एंटी करप्शन टीम ने जाल बिछाया। तय रकम के साथ जैसे ही लेन-देन हुआ, टीम ने मौके पर छापा मारकर थाना प्रभारी को पकड़ लिया। पूरी कार्रवाई की निगरानी वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा की गई।
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“क्या कानून की कुर्सी पर बैठकर न्याय बेचा जा रहा है? क्या बलात्कार जैसे गंभीर मामलों में भी फाइलें पैसों के हिसाब से चलेंगी? प्रयागराज से आई ये तस्वीरें कई बड़े सवाल खड़े कर रही हैं। एंटी करप्शन की इस कार्रवाई ने साफ कर दिया है कि भ्रष्टाचार पर अब शिकंजा कस रहा है… लेकिन सवाल है — आखिर ऐसे अधिकारी सिस्टम में कब तक पनपते रहेंगे?
ऑफिस में ही हो रही थी सेटिंग की बातचीत
जानकारी के अनुसार, यह पूरा लेन-देन थाना परिसर के अंदर ही हो रहा था। आरोप है कि केस को कमजोर करने और अंतिम रिपोर्ट लगाने के एवज में 75 हजार रुपये की डील तय हुई थी।
पुलिस विभाग में मचा हड़कंप
थाना प्रभारी की गिरफ्तारी के बाद पुलिस विभाग में हड़कंप मच गया है। उच्चाधिकारियों ने मामले की जांच के आदेश दे दिए हैं। संबंधित अधिकारी के खिलाफ विभागीय कार्रवाई भी तय मानी जा रही है।
भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्ती या दिखावा?
प्रयागराज की यह घटना एक बार फिर सवाल खड़े करती है कि आखिर आम जनता न्याय के लिए कहां जाए, जब थाने के भीतर ही सौदेबाजी होने लगे।




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