बड़ी खबर: मजिस्ट्रेट करेंगे थानों में अचानक छापा, CCTV फुटेज से खुलेगी पुलिस की पोल!

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  • कोर्ट का सख्त निर्देश: थानों में औचक पहुंचेगे मजिस्ट्रेट
  • CCTV फुटेज 6 महीने तक सुरक्षित न रखने पर होगी कड़ी कार्रवाई

प्रयागराज/लखनऊ। थानों में होने वाली कथित मनमानी और हिरासत में उत्पीड़न की शिकायतों पर सख्त रुख अपनाते हुए कोर्ट ने बड़ा आदेश दिया है। अब मजिस्ट्रेट अचानक थानों में पहुंचकर सीसीटीवी कैमरों की जांच करेंगे और फुटेज का निरीक्षण करेंगे।

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कोर्ट ने साफ कहा है कि थानों में लगे CCTV की रिकॉर्डिंग कम से कम 6 महीने तक सुरक्षित रखना अनिवार्य होगा। यदि फुटेज गायब मिली या जानबूझकर डिलीट की गई तो संबंधित अधिकारियों पर कड़ी कार्रवाई होगी।

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आदेश की अवहेलना पर अवमानना की चेतावनी

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अदालत ने स्पष्ट किया है कि पुलिस अधिकारियों द्वारा कोर्ट के आदेश की अनदेखी गंभीर अपराध मानी जाएगी। जरूरत पड़ने पर अवमानना की कार्यवाही भी की जा सकती है।

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यह निर्देश सुप्रीम कोर्ट द्वारा पहले दिए गए आदेशों की याद दिलाते हुए जारी किया गया है, जिसमें कहा गया था कि हर थाने और जांच एजेंसी के कार्यालय में CCTV कैमरे अनिवार्य रूप से कार्यशील स्थिति में हों।

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 क्यों जरूरी है 6 महीने का फुटेज?

  •  • हिरासत में मारपीट या अवैध वसूली की शिकायतों की निष्पक्ष जांच
  •  • पुलिस कार्रवाई की पारदर्शिता
  •  • आम नागरिकों के अधिकारों की रक्षा
  •  • फर्जी मुकदमों या झूठे आरोपों की सच्चाई सामने लाना

कोर्ट ने यह भी कहा कि CCTV सिस्टम खराब होने की स्थिति में उसकी तत्काल मरम्मत कराई जाए और रिकॉर्ड सुरक्षित रखने की जिम्मेदारी थाना प्रभारी की होगी।

प्रशासन में हलचल

इस आदेश के बाद पुलिस महकमे में हलचल मच गई है। अब किसी भी समय मजिस्ट्रेट थाने पहुंचकर रिकॉर्ड खंगाल सकते हैं। इससे थानों की कार्यप्रणाली पर सीधा असर पड़ेगा और जवाबदेही बढ़ेगी।

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निष्कर्ष:

यह फैसला आम जनता के अधिकारों की सुरक्षा और पुलिस तंत्र में पारदर्शिता लाने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है। अब देखना होगा कि जमीनी स्तर पर इस आदेश का पालन कितनी सख्ती से होता है।

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