बेरोजगारी का कड़वा सच: 20 चपरासी पदों के लिए 6050 अभ्यर्थियों का इंटरव्यू, डिग्रीधारी भी लाइन में

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  • 20 पद, 6050 उम्मीदवार: आंकड़ों ने चौंकाया
  •  आठवीं पास योग्यता, फिर भी डिग्रीधारी पहुंचे इंटरव्यू देने
  •  6632 आवेदन, पांच दिन चला साक्षात्कार
  •  रोजाना 1200 से ज्यादा अभ्यर्थियों को बुलाया गया

हिसार: हरियाणा के हिसार से सामने आई एक भर्ती प्रक्रिया ने बेरोजगारी की गंभीर तस्वीर को उजागर कर दिया है। जिला एवं सत्र न्यायाधीश कार्यालय में चपरासी के मात्र 20 पदों के लिए 6050 अभ्यर्थियों ने इंटरव्यू दिया। यह आंकड़ा न सिर्फ चौंकाने वाला है, बल्कि रोजगार व्यवस्था पर बड़े सवाल भी खड़े करता है।

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 भर्ती प्रक्रिया का पूरा विवरण

अदालत प्रशासन द्वारा 28 जनवरी 2026 को 20 चपरासी पदों के लिए विज्ञापन जारी किया गया था। इन पदों के लिए न्यूनतम शैक्षणिक योग्यता आठवीं पास निर्धारित की गई थी। आवेदन की अंतिम तिथि 11 फरवरी रखी गई।

महज कुछ दिनों में कुल 6632 आवेदन प्राप्त हुए। दस्तावेजों की जांच के बाद 6050 अभ्यर्थियों को इंटरव्यू के लिए बुलाया गया। 17 फरवरी से 21 फरवरी तक पांच दिनों में साक्षात्कार आयोजित किए गए। प्रतिदिन करीब 1200 से 1300 उम्मीदवारों को बुलाया गया।

डिग्रीधारी युवाओं की लंबी कतार

सबसे हैरान करने वाली बात यह रही कि इन पदों के लिए बड़ी संख्या में बीए, एमए, एमकॉम, बीएड और अन्य उच्च शिक्षित अभ्यर्थी भी पहुंचे। कई उम्मीदवारों ने बताया कि वर्षों से प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने के बावजूद स्थायी नौकरी नहीं मिल पा रही है। ऐसे में परिवार की आर्थिक जिम्मेदारियों को देखते हुए वे किसी भी सरकारी नौकरी के लिए आवेदन कर रहे हैं।

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उम्मीदवारों की पीड़ा

इंटरव्यू देने आए युवाओं ने कहा कि निजी क्षेत्र में नौकरी की स्थिरता नहीं है और वेतन भी कम मिलता है। वहीं सरकारी नौकरी में भले पद छोटा हो, लेकिन सुरक्षा और नियमित वेतन की गारंटी होती है।

कई अभ्यर्थियों ने यह भी कहा कि बड़ी भर्तियों में लंबे समय तक परिणाम लंबित रहते हैं, इसलिए वे छोटे पदों पर भी आवेदन कर रहे हैं।

आंकड़े जो सोचने पर मजबूर करें

  • कुल पद: 20
  • कुल आवेदन: 6632
  • इंटरव्यू देने वाले अभ्यर्थी: 6050
  • औसतन एक पद के लिए करीब 300 से अधिक उम्मीदवार

यह अनुपात बताता है कि मांग और उपलब्ध नौकरियों के बीच भारी असंतुलन है।

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रोजगार नीति पर सवाल

विशेषज्ञों का मानना है कि बढ़ती आबादी और उच्च शिक्षा के विस्तार के बावजूद रोजगार सृजन की गति पर्याप्त नहीं है। सरकारी नौकरियों की संख्या सीमित है, जबकि हर साल लाखों युवा नौकरी के बाजार में प्रवेश कर रहे हैं।

हिसार की यह भर्ती प्रक्रिया एक उदाहरण भर है, लेकिन यह देशभर में युवाओं की वास्तविक स्थिति को दर्शाती है।

निष्कर्ष

जब उच्च शिक्षित युवा आठवीं पास योग्यता वाले पद के लिए हजारों की संख्या में आवेदन करें, तो यह केवल एक भर्ती की खबर नहीं, बल्कि रोजगार व्यवस्था पर गंभीर संकेत है।

सरकार और नीति निर्माताओं के सामने सबसे बड़ी चुनौती यही है कि युवाओं के लिए सम्मानजनक और स्थायी रोजगार के अवसर कैसे बढ़ाए जाएं।

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