- UPSRTC की समीक्षा बैठक में संचालन व्यवस्था पर सख्त निर्देश
- हर निर्धारित बस स्टॉप पर रोक अनिवार्य, चालकों-परिचालकों को चेतावनी
- समय-सारिणी का पालन नहीं करने पर होगी जवाबदेही तय
- दिन-रात सक्रिय रहेंगे जांच स्क्वॉड, औचक निरीक्षण के आदेश
न्यूज़ डेस्क
लखनऊ, 17 फरवरी 2026। उत्तर प्रदेश राज्य सड़क परिवहन निगम में अब लापरवाही नहीं चलेगी। निगम के प्रबंध निदेशक प्रभु एन. सिंह ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए सभी क्षेत्रों के अधिकारियों के साथ बड़ी समीक्षा बैठक की और साफ शब्दों में संदेश दे दिया – निर्धारित स्टॉप पर बस नहीं रुकी तो जिम्मेदारी तय होगी।
बैठक में निगम मुख्यालय के वरिष्ठ अधिकारी और सभी क्षेत्रीय प्रबंधक मौजूद रहे। संचालन व्यवस्था, समयपालन, यात्री सुविधाओं और राजस्व वृद्धि जैसे मुद्दों पर गहन मंथन हुआ।
“समय पर बस, हर स्टॉप पर बस” – सख्त निर्देश
एमडी ने दो टूक कहा कि:
- सभी बसें निर्धारित समय-सारिणी के अनुसार ही चलेंगी
- हर निर्धारित स्टॉप पर बस रोकना अनिवार्य होगा
- किसी भी यात्री को बीच रास्ते में छोड़ने या स्टॉप न देने की शिकायत बर्दाश्त नहीं होगी
उन्होंने साफ किया कि बसें स्टॉप छोड़कर सीधे निकल जाने की शिकायतें लगातार मिल रही थीं, जिससे यात्रियों को भारी परेशानी होती है और निगम की छवि भी खराब होती है।
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अब परिचालक और चालक यात्रियों को बैठाकर उनके गंतव्य तक पहुंचाने के लिए पूर्ण रूप से जिम्मेदार होंगे।
जांच स्क्वॉड को खुली छूट – दिन-रात होगी चेकिंग
एमडी ने सभी जांच स्क्वॉड टीमों को कड़ा निर्देश दिया कि:
- दिन और रात दोनों समय औचक निरीक्षण किए जाएं
- बिना टिकट यात्रा, स्टॉप न रोकना और समय उल्लंघन पर तत्काल कार्रवाई हो
- राजस्व लीकेज पर पूरी तरह रोक लगाई जाए
उन्होंने कहा कि जांच व्यवस्था जितनी मजबूत होगी, निगम की आय उतनी ही मजबूत होगी।
राजस्व वृद्धि पर फोकस
बैठक में यह भी साफ किया गया कि निगम की आय में निरंतर वृद्धि सर्वोच्च प्राथमिकता है।
एमडी ने कहा कि:
“यात्री संतुष्ट होंगे तो आय अपने आप बढ़ेगी। अनुशासन और पारदर्शिता ही निगम को मजबूत बनाएगी।”
उन्होंने सभी क्षेत्रीय प्रबंधकों को अपने-अपने क्षेत्रों में व्यक्तिगत निगरानी बढ़ाने के निर्देश दिए।
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क्या बदल सकता है इस फैसले से?
- यात्रियों को स्टॉप पर इंतजार की समस्या से राहत
- समय से बस संचालन में सुधार
- टिकटिंग में पारदर्शिता
- निगम की आय में संभावित वृद्धि
अब देखना होगा कि सख्त निर्देश जमीनी स्तर पर कितने प्रभावी साबित होते हैं।




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