खाद माफियाओं की मनमानी! बुजुर्गों को लाइन में तड़पाया, अपनों को अंदर से बांटी गई यूरिया

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  • छतोह ब्लॉक की M-PACS ग्रकोडरा समिति में खाद वितरण के नाम पर भेदभाव
  • बुजुर्ग किसानों को दिनभर लाइन में खड़ा रखकर किया गया अपमान

ग्राउंड ज़ीरो रिपोर्ट 

छतोह/सलोन (रायबरेली)।छतोह ब्लॉक की बहुउद्देशीय प्राथमिक ग्रामीण सहकारी समिति (M-PACS) ग्रकोडरा में जो हुआ, उसने सरकारी व्यवस्था की सच्चाई उजागर कर दी। खाद के लिए सुबह से लाइन लगाए किसान—जिनमें 70 साल से ऊपर के बुजुर्ग भी शामिल थे—दिनभर धूप में खड़े रहे, लेकिन शाम तक उनके हाथ खाली रहे। उधर, समिति के भीतर से कर्मचारियों के खास और जान-पहचान वाले लोग आधार कार्ड पर अंगूठा लगाकर यूरिया की बोरियां धड़ल्ले से उठाते रहे।

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किसानों का आरोप है कि एक दिन पहले ही 14 से 16 आधार कार्ड जमा कराए गए थे, फिर भी उन्हें खाद नहीं दी गई। इसके उलट, दूसरी समितियों से जुड़े कर्मचारी-परिचितों को जरूरत से कहीं ज्यादा खाद दे दी गई। जब किसानों ने सवाल उठाया तो उन्हें धमकाते हुए कहा गया—“जहां शिकायत करनी हो कर दो”।

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इस खुली लूट और भेदभाव से किसानों में आक्रोश फूट पड़ा है। उनका कहना है कि यह सिर्फ अव्यवस्था नहीं, बल्कि सुनियोजित भ्रष्टाचार है, जिससे खेत-खलिहान और फसल दोनों बर्बाद होने की कगार पर हैं। किसानों ने तहसील सलोन व जिला रायबरेली प्रशासन से तत्काल जांच, दोषियों पर सख्त कार्रवाई और पारदर्शी खाद वितरण की मांग की है।

अब सवाल यह है—क्या प्रशासन किसानों की पीड़ा सुनेगा, या खाद माफियाओं की मनमानी यूं ही चलती रहेगी?

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