- 1. बस में छूटे रुपये और सामान को सुरक्षित रखा
- बस संख्या UP78JT8622 में यात्रा के दौरान एक यात्री का सामान और 500-500 रुपये की गड्डी बस में छूट गई थी, जिसे परिचालक सुनील कुमार ने सुरक्षित अपने पास रख लिया।
- 2. कैसरबाग डिपो के परिचालक की मदद से मिली जानकारी
- यात्री को बस का नंबर नहीं पता था, लेकिन कैसरबाग डिपो के एक परिचालक के माध्यम से परिचालकों के समूह में सूचना पहुंची, जहां से सुनील कुमार ने सामान मिलने की पुष्टि की।
- 3. होली के बाद खुद जाकर लौटाया सामान
- सुनील कुमार ने जिम्मेदारी निभाते हुए होली के एक दिन बाद खुद यात्री से मिलकर उसका पूरा सामान और रुपये सुरक्षित वापस कर दिए।
- 4. इनाम के पैसे लेने से किया साफ इनकार
- यात्री ने खुशी में 1000 रुपये इनाम देने की कोशिश की, लेकिन सुनील कुमार ने यह कहते हुए मना कर दिया कि उन्होंने सिर्फ अपना कर्तव्य निभाया है।
- 5. विभाग में ईमानदारी की बनी मिसाल
- सुनील कुमार की इस ईमानदारी की चर्चा पूरे परिवहन विभाग में हो रही है और शाहजहांपुर डिपो के कर्मचारी उनके इस कार्य पर गर्व जता रहे हैं
शाहजहांपुर/लखनऊ:
उत्तर प्रदेश परिवहन निगम में जहां अक्सर परिचालकों पर तरह-तरह के आरोप लगाए जाते हैं, वहीं शाहजहांपुर डिपो के परिचालक सुनील कुमार ने ईमानदारी की ऐसी मिसाल पेश की है, जिसने पूरे विभाग को गर्व करने का मौका दिया है। उन्होंने बस में छूटे यात्री के हजारों रुपये और सामान सुरक्षित लौटाकर न सिर्फ अपनी जिम्मेदारी निभाई, बल्कि इनाम के तौर पर दिए गए पैसे भी लेने से मना कर दिया।https://www.facebook.com/share/r/16zVGkzrYV/?mibextid=wwXIfr
बस में छूट गया था रुपयों का बंडल और सामान
जानकारी के मुताबिक बस संख्या UP78JT8622 में यात्रा कर रहे एक यात्री का सामान और 500-500 रुपये के नोटों की गड्डी बस में ही छूट गई थी। यात्री के पास बस का नंबर भी नहीं था, जिससे उसे अपना सामान वापस मिलने की उम्मीद लगभग खत्म हो चुकी थी।
परिचालकों के समूह से मिली जानकारी
इसी बीच यात्री की मुलाकात कैसरबाग डिपो के एक परिचालक से हुई। उन्होंने परिचालकों के समूह के माध्यम से जानकारी साझा की। इस दौरान शाहजहांपुर डिपो के परिचालक सुनील कुमार ने बताया कि संबंधित सामान उन्हें बस में मिला है और उन्होंने उसे सुरक्षित रख लिया है।
होली के बाद खुद जाकर लौटाया सामान
सुनील कुमार ने पूरी जिम्मेदारी के साथ सामान को सुरक्षित रखा और होली के एक दिन बाद स्वयं यात्री से मिलकर उसका पैसा और सामान वापस कर दिया। अपना खोया सामान वापस पाकर यात्री बेहद खुश हुआ।
इनाम के 1000 रुपये भी लेने से किया इंकार
खुशी में यात्री ने सुनील कुमार को 1000 रुपये इनाम देने की कोशिश की, लेकिन सुनील कुमार ने यह कहते हुए पैसे लेने से मना कर दिया कि
“यह हमारी जरूरत नहीं है, हमने सिर्फ अपना कर्तव्य निभाया है। यह राशि किसी जरूरतमंद की मदद में लगा दीजिए।”
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विभाग को हुआ गर्व
सुनील कुमार की इस ईमानदारी की चर्चा अब पूरे परिवहन विभाग में हो रही है। शाहजहांपुर डिपो के कर्मचारी और अधिकारी भी उनके इस कार्य पर गर्व जता रहे हैं।
व्यवस्था पर भी उठे सवाल
परिवहन विभाग में अक्सर चालक-परिचालकों पर गबन या चोरी के आरोप लगते रहे हैं, लेकिन ऐसे कई उदाहरण सामने आते रहते हैं जब चालक-परिचालक यात्रियों के लाखों रुपये या ज्वैलरी तक ईमानदारी से वापस करते हैं। ऐसे में यह भी सवाल उठता है कि यदि कर्मचारी नियुक्ति के समय ईमानदारी का प्रमाण देकर आते हैं तो व्यवस्था में खामियां कहां हैं।
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परिचालक सुनील कुमार की ईमानदारी ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि जिम्मेदारी और कर्तव्य के आगे किसी भी इनाम की कोई कीमत नहीं होती।https://youtube.com/shorts/Re6x6VMxR2A?feature=share
👉 ऐसे कर्मठ और ईमानदार कर्मचारियों को समाज का सम्मान मिलना ही चाहिए।
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