- राम मंदिर चढ़ावा गड़बड़ी मामले में पूर्व ड्राइवर टिन्नू यादव की संपत्तियां जांच के घेरे में, ट्रस्ट प्रशासन और वित्तीय प्रबंधन पर उठ रहे सवाल
- एसआईटी की जांच में सामने आ रहे नए तथ्य, करोड़ों की संपत्ति और 24 कमरों के हॉस्टल को लेकर बढ़ी राजनीतिक हलचल
न्यूज़ डेस्क
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अयोध्या, 16 जून। राम मंदिर चढ़ावा गड़बड़ी मामले की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, वैसे-वैसे नए सवाल और नए नाम सामने आ रहे हैं। इस पूरे विवाद के केंद्र में अब श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत रॉय की भूमिका को लेकर भी चर्चा तेज हो गई है। हालांकि अब तक किसी जांच एजेंसी ने चंपत राय को आरोपी नहीं माना है और न ही उनके खिलाफ कोई आधिकारिक आरोप तय हुआ है।
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राम मंदिर में श्रद्धालुओं द्वारा चढ़ाई जाने वाली राशि में कथित अनियमितताओं की शिकायतों के बाद उत्तर प्रदेश सरकार ने एसआईटी का गठन किया है। जांच का दायरा चढ़ावे की गिनती, रिकॉर्डिंग, बैंक जमा प्रक्रिया और उससे जुड़े लोगों की भूमिका तक बढ़ाया गया है।
टिन्नू यादव कनेक्शन से बढ़ी चर्चा
मामले में सबसे अधिक चर्चा राम शंकर यादव उर्फ टिन्नू यादव को लेकर हो रही है, जिन्हें चंपत राय का पूर्व ड्राइवर बताया जाता है। स्थानीय स्तर पर यह दावा किया जा रहा है कि कुछ वर्षों पहले तक सामान्य आर्थिक स्थिति में रहने वाले टिन्नू यादव के पास आज करोड़ों रुपये की संपत्तियां हैं, जिनमें अयोध्या कैंट क्षेत्र में स्थित 24 कमरों वाला एक हॉस्टल भी शामिल बताया जा रहा है।
इन्हीं दावों के बाद विपक्षी दलों और कुछ सामाजिक संगठनों ने मांग उठाई है कि टिन्नू यादव की संपत्तियों और उनकी आय के स्रोतों की गहन जांच की जाए तथा यह भी देखा जाए कि उनके प्रभाव और पहुंच का आधार क्या था।
क्या है चंपत राय की जिम्मेदारी?
श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव होने के नाते चंपत राय मंदिर प्रशासन और ट्रस्ट के विभिन्न कार्यों के प्रमुख समन्वयक हैं। मंदिर निर्माण, प्रबंधन और विभिन्न प्रशासनिक गतिविधियों में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही है। इसी कारण चढ़ावे से जुड़े विवाद में उनका नाम चर्चा में आना स्वाभाविक माना जा रहा है।
हालांकि अभी तक जांच एजेंसियों ने उनके खिलाफ किसी भी प्रकार की प्रत्यक्ष भूमिका या संलिप्तता की पुष्टि नहीं की है।
विनय कटियार ने भी उठाए सवाल
भाजपा के वरिष्ठ नेता और पूर्व सांसद Vinay Katiyar ने भी मामले की निष्पक्ष जांच की मांग करते हुए कहा है कि यदि जांच में किसी भी स्तर पर अनियमितता सामने आती है तो दोषियों को बख्शा नहीं जाना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि जांच का दायरा व्यापक होना चाहिए और किसी को भी जांच से बाहर नहीं रखा जाना चाहिए।
चंपत राय ने क्या कहा?
चंपत राय और ट्रस्ट की ओर से पहले भी यह कहा गया है कि मंदिर के चढ़ावे और वित्तीय लेन-देन का नियमित ऑडिट होता है तथा सभी प्रक्रियाएं निर्धारित नियमों के अनुसार संचालित की जाती हैं। ट्रस्ट का कहना है कि श्रद्धालुओं के विश्वास की रक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है और किसी भी आरोप की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।
सरकार का सख्त रुख
उत्तर प्रदेश सरकार ने स्पष्ट किया है कि राम मंदिर करोड़ों लोगों की आस्था का केंद्र है और चढ़ावे के एक-एक रुपये की पारदर्शिता सुनिश्चित की जाएगी। सरकार का कहना है कि एसआईटी स्वतंत्र रूप से जांच कर रही है और जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई तय होगी।
अभी जांच जारी, निष्कर्ष बाकी
फिलहाल मामले में कई आरोप और दावे सामने आए हैं, लेकिन किसी भी व्यक्ति के खिलाफ आरोप सिद्ध नहीं हुए हैं। एसआईटी बैंक खातों, संपत्तियों, वित्तीय रिकॉर्ड और संबंधित व्यक्तियों की भूमिका की जांच कर रही है। अंतिम तस्वीर जांच रिपोर्ट आने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।
(नोट: यह खबर उपलब्ध सार्वजनिक सूचनाओं, बयानों और चल रही जांच पर आधारित है। जांच पूरी होने तक किसी भी व्यक्ति को दोषी नहीं माना जा सकता।)





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