महंगाई का एक और झटका! बिस्किट से साबुन-तेल तक महंगे होने की तैयारी, बढ़ती लागत ने बढ़ाई कंपनियों की चिंता

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कच्चे माल, पैकेजिंग और माल ढुलाई की लागत बढ़ने से FMCG कंपनियों पर दबाव; आने वाले दिनों में ग्राहकों की जेब पर पड़ सकता है असर

 

नई दिल्ली। रोजमर्रा की जरूरतों का सामान खरीदने वाले आम लोगों के लिए महंगाई का एक और झटका सामने आ सकता है। बिस्किट, साबुन, डिटर्जेंट, शैंपू, पैकेज्ड फूड और अन्य FMCG उत्पादों की कीमतों में आने वाले समय में बढ़ोतरी की संभावना जताई जा रही है। कंपनियों पर कच्चे माल, पैकेजिंग, ईंधन और लॉजिस्टिक्स की बढ़ती लागत का दबाव बना हुआ है। ऐसे में कई कंपनियां लागत का कुछ हिस्सा ग्राहकों पर डालने के लिए चुनिंदा उत्पादों की कीमत बढ़ाने की तैयारी में हैं।

 

क्यों बढ़ सकती हैं कीमतें?

 

FMCG कंपनियों की लागत कई स्तरों पर बढ़ रही है। कच्चे तेल से जुड़े उत्पादों की कीमतों में उतार-चढ़ाव का सीधा असर पैकेजिंग, प्लास्टिक और कई केमिकल आधारित कच्चे माल पर पड़ता है। इसके अलावा ईंधन और माल ढुलाई महंगी होने से फैक्ट्री से लेकर डिस्ट्रीब्यूटर और रिटेलर तक पूरी सप्लाई चेन की लागत बढ़ जाती है।

 

भू-राजनीतिक तनाव और वैश्विक सप्लाई चेन में व्यवधान ने भी कंपनियों की मुश्किलें बढ़ाई हैं। कंपनियों का कहना है कि लगातार बढ़ती इनपुट लागत के बीच मार्जिन बनाए रखना चुनौती बनता जा रहा है।

 

बिस्किट से साबुन तक असर

 

इस संभावित बढ़ोतरी का असर उन उत्पादों पर पड़ सकता है जिनका इस्तेमाल लगभग हर घर में होता है। इनमें—

 

  •  बिस्किट और पैकेज्ड फूड
  • साबुन और डिटर्जेंट
  • शैंपू और पर्सनल केयर उत्पाद
  • पैकेज्ड पेय पदार्थ
  • घरेलू सफाई के उत्पाद
  • खाद्य एवं हेयर ऑयल

 

जैसी श्रेणियां शामिल हैं।

 

रिपोर्टों के अनुसार कंपनियां सीधे MRP बढ़ाने के अलावा छोटे पैक में मात्रा घटाने या प्रमोशनल डिस्काउंट कम करने जैसे विकल्पों पर भी काम कर सकती हैं। इससे ग्राहक को कीमत में बड़ा बदलाव दिखाई न देने के बावजूद प्रति ग्राम या प्रति मिलीलीटर वास्तविक लागत बढ़ सकती है

 

अगस्त में भी कीमत बढ़ाने का दबाव

 

जुलाई के अंत में सामने आई रिपोर्टों के मुताबिक कई उपभोक्ता कंपनियां अगस्त में कीमतों में एक और चरण की बढ़ोतरी करने की तैयारी में थीं। यह इस साल कई कैटेगरी में तीसरी कीमत बढ़ोतरी हो सकती है। बढ़ती कच्चे माल की कीमत, माल ढुलाई की लागत और रुपये में उतार-चढ़ाव को इसके पीछे प्रमुख वजह बताया गया है। कुछ मामलों में बढ़ोतरी 8 फीसदी तक होने की संभावना जताई गई थी, हालांकि वास्तविक बढ़ोतरी कंपनी और उत्पाद के हिसाब से अलग-अलग होगी।

 

कंपनियों के सामने दोहरी चुनौती

 

FMCG कंपनियों के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह है कि लागत बढ़ने के बावजूद वे ग्राहकों पर पूरा बोझ नहीं डाल सकतीं। कीमत ज्यादा बढ़ाने पर मांग प्रभावित होने का खतरा रहता है।

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इसी वजह से कंपनियां फिलहाल ‘कैलिब्रेटेड प्राइस हाइक’ यानी सीमित और चुनिंदा उत्पादों पर कीमत बढ़ाने की रणनीति अपना रही हैं। कुछ कंपनियां लागत कम करने, सप्लाई चेन को बेहतर बनाने और पैकेजिंग में बदलाव के जरिए भी दबाव कम करने की कोशिश कर रही हैं।

 

हर चीज महंगी नहीं होगी, लेकिन किराना बजट पर दबाव बढ़ सकता है

 

यह भी ध्यान रखना जरूरी है कि सभी FMCG उत्पादों की कीमत एक साथ बढ़ना तय नहीं है। कंपनियां अलग-अलग उत्पादों और बाजारों के हिसाब से फैसला ले सकती हैं। इसके अलावा कुछ कच्चे माल की कीमतों में गिरावट से कंपनियों को राहत भी मिली है।

 

मसलन, अगस्त की शुरुआत में Marico के तिमाही नतीजों में कंपनी को कुछ प्रमुख कच्चे माल की लागत में राहत मिली। कंपनी ने बताया कि अप्रैल-जून तिमाही के दौरान कोपरा की कीमतें अपने शिखर से करीब 45 फीसदी नीचे आई थीं।

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इससे साफ है कि हर उत्पाद में कीमत बढ़ना तय नहीं है, लेकिन जिन कंपनियों पर कच्चे माल और पैकेजिंग लागत का दबाव ज्यादा है, वहां कीमत बढ़ाने की संभावना बनी हुई है।

 

आम आदमी पर क्या होगा असर?

 

अगर कीमतों में बढ़ोतरी का यह सिलसिला आगे भी जारी रहता है तो इसका सीधा असर परिवारों के मासिक किराना बजट पर पड़ सकता है। खासकर कम और मध्यम आय वाले परिवारों के लिए रोजमर्रा की छोटी-छोटी कीमत बढ़ोतरी महीने के अंत में बड़ा अतिरिक्त खर्च बन सकती है।

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यानी फिलहाल राहत की पूरी तस्वीर नहीं है। कंपनियां लागत और मुनाफे के बीच संतुलन बनाने की कोशिश कर रही हैं और इसका असर धीरे-धीरे ग्राहकों की खरीदारी पर दिखाई दे सकता है।

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सीधी बात

 

बिस्किट से साबुन और शैंपू से डिटर्जेंट तक—रोजमर्रा के FMCG सामान पर महंगाई का दबाव बना हुआ है। कच्चा माल, पैकेजिंग, ईंधन और लॉजिस्टिक्स की बढ़ती लागत कंपनियों को कीमत बढ़ाने की ओर धकेल रही है। हालांकि, कितनी और किन चीजों की कीमत बढ़ेगी, यह कंपनी और उत्पाद के हिसाब से अलग-अलग होगा।

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