- शरणालय में बच्चों की पढ़ाई पर भी जोर
- चलित शौचालय लगाने और सफाई कर्मियों की संख्या बढ़ाने के निर्देश, लापरवाही पर सख्त चेतावनी
मोहम्मद इसरार, जिला संवाददाता
फर्रुखाबाद। गंगा के लगातार बढ़ते जलस्तर के बीच जिला प्रशासन ने बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में राहत एवं बचाव व्यवस्था को लेकर मोर्चा संभाल लिया है। जिलाधिकारी डॉ. अंकुर लाठर और पुलिस अधीक्षक आरती सिंह ने संयुक्त रूप से समेचीपुर चितार गांव तथा शमसाबाद अनाज मंडी स्थित बाढ़ शरणालय का निरीक्षण किया।
बाइट: जिलाधिकारी डॉ. अंकुर लाठर
समेचीपुर चितार पहुंचकर डीएम और एसपी ने बाढ़ प्रभावित ग्रामीणों से सीधे संवाद किया और उनकी समस्याएं सुनीं। अधिकारियों ने ग्रामीणों को हरसंभव मदद का भरोसा दिलाया। डीएम ने कहा कि आपदा की स्थिति में लोगों की सुरक्षा प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने खतरे को देखते हुए ग्रामीणों से सुरक्षित शरणालयों में पहुंचने की अपील की।
यूपी-बिहार के यात्रियों के लिए बड़ी खबर, बढ़ सकती हैं बस सेवाएं; किराए में भी एकरूपता की तैयारी
डीएम ने बताया कि बाढ़ का पानी उतरने के बाद प्रभावित परिवारों को पट्टे की भूमि आवंटित करने की कार्रवाई की जा रही है, जिससे उन्हें सुरक्षित और स्थायी आवास उपलब्ध कराया जा सके।
ददुआ एनकाउंटर: 19 साल पहले जंगल में STF का सबसे बड़ा ऑपरेशन, ऐसे हुआ था कुख्यात डकैत का खात्मा
इसके बाद दोनों अधिकारी शमसाबाद अनाज मंडी स्थित बाढ़ शरणालय पहुंचे। यहां उन्होंने भोजन, पेयजल, स्वास्थ्य, स्वच्छता और अन्य मूलभूत सुविधाओं की स्थिति का जायजा लिया। शरणालय में मौजूद बच्चों को फल और बिस्किट वितरित किए गए। साथ ही बच्चों की पढ़ाई की व्यवस्था भी देखी गई।
डीएम ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि बाढ़ की स्थिति के बावजूद बच्चों की पढ़ाई प्रभावित नहीं होनी चाहिए। राहत शिविर में शैक्षणिक गतिविधियां जारी रखने की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।
गर्मी को देखते हुए राहत शिविर में आवश्यक संसाधन बढ़ाने, चलित शौचालय स्थापित करने और पर्याप्त संख्या में सफाई कर्मियों की तैनाती के निर्देश दिए गए। डीएम ने अधिकारियों को चेतावनी दी कि राहत और बचाव कार्य में किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
4,400 करोड़ की परियोजना! लोकार्पण से पहले धंसा राम वनगमन पथ, अब ठेकेदार पर जुर्माना
गंगा के लगातार बढ़ते जलस्तर के बीच डीएम-एसपी का ग्राउंड जीरो निरीक्षण प्रशासन की सक्रियता का संकेत है। जिला प्रशासन का जोर प्रभावित लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाने के साथ-साथ शरणालयों में उन्हें बेहतर मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराने पर है।


