चित्रकूट। बुंदेलखंड और चंबल के बीहड़ों में कभी दहशत का पर्याय रहे कुख्यात दस्यु सरगना शिवकुमार पटेल उर्फ ददुआ का नाम आज भी उत्तर प्रदेश के सबसे चर्चित डकैतों में लिया जाता है। उसके खिलाफ चलाए गए ऑपरेशन को उत्तर प्रदेश STF के सबसे बड़े और चुनौतीपूर्ण अभियानों में गिना जाता है।
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कहानी शुरू होती है 15 अप्रैल 2007 से, जब उत्तर प्रदेश में तत्कालीन मुख्यमंत्री मायावती की सरकार थी। ददुआ को पकड़ने के लिए STF ने ऑपरेशन की रणनीति तैयार करनी शुरू की। इस ऑपरेशन की कमान STF के तत्कालीन अधिकारियों एसएसपी अमिताभ यश और एएसपी अनंत देव जैसे अधिकारियों के हाथ में थी।
22 जुलाई की रात मिला निर्णायक इनपुट
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बताया जाता है कि 22 जुलाई की सुबह करीब 3 बजे मुखबिर और सर्विलांस से STF को सूचना मिली कि ददुआ अपने गैंग के साथ चित्रकूट के मानिकपुर क्षेत्र के आल्हा-झलमल के जंगलों में मौजूद है।
सूचना मिलते ही STF की टीम बिना समय गंवाए जंगल की ओर बढ़ी। टीम ने बेहद सावधानी से आगे बढ़ते हुए करीब 10 किलोमीटर का जंगल का रास्ता तय किया। इसके बाद जवानों ने लगभग एक घंटे तक अपनी पोजीशन संभाली और ददुआ के गैंग को घेरने की रणनीति तैयार की।
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एक घंटे से ज्यादा चली मुठभेड़
इसके बाद STF ने ददुआ के गैंग पर कार्रवाई शुरू की। जंगल में दोनों तरफ से जमकर गोलीबारी हुई। करीब एक घंटे से ज्यादा चली मुठभेड़ के बाद STF ने कुख्यात दस्यु सरगना शिवकुमार पटेल उर्फ ददुआ और उसके पांच साथियों को मार गिराने का दावा किया।
सुबह करीब 9:15 बजे ऑपरेशन के सफल होने की सूचना वायरलेस के जरिए वरिष्ठ अधिकारियों तक पहुंचाई गई।
हेलीकॉप्टर से घटनास्थल पहुंचे DGP
मुठभेड़ की खबर मिलते ही तत्कालीन DGP विक्रम सिंह खुद हेलीकॉप्टर से घटनास्थल पर पहुंचे। इसके साथ ही उत्तर प्रदेश पुलिस के लिए यह ऑपरेशन एक बड़ी कामयाबी के तौर पर सामने आया।
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ददुआ के खात्मे के साथ ही बुंदेलखंड के जंगलों में लंबे समय से सक्रिय उसके गैंग का आतंक भी कमजोर पड़ा। यह मुठभेड़ आज भी उत्तर प्रदेश की सबसे चर्चित पुलिस कार्रवाइयों में शामिल है।
ददुआ की कहानी सिर्फ एक डकैत के अंत की कहानी नहीं, बल्कि उस दौर की है जब बीहड़ों में कानून और अपराधियों के बीच सीधी जंग चलती थी।
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