500 मीटर में 118 जगह दरारों का दावा, एप्रोच रोड भी झुकी; जांच और मरम्मत पर उठे सवाल
ड्रेनेज खराबी को बताया गया वजह, एक हफ्ते में मरम्मत के निर्देश और खर्च का 20% जुर्माना
प्रयागराज। अयोध्या से चित्रकूट तक करीब 210 किलोमीटर लंबे राम वनगमन पथ की निर्माण गुणवत्ता पर सवाल खड़े हो गए हैं। प्रयागराज के श्रृंगवेरपुर धाम के पास नवनिर्मित सड़क में बारिश के बाद दरारें और धंसाव सामने आया है। शुरुआती रिपोर्टों में करीब 100 मीटर के दायरे में चार स्थानों पर दरार और सड़क धंसने की बात सामने आई थी। बाद की स्थानीय रिपोर्ट में करीब 500 मीटर हिस्से में 118 स्थानों पर दरार और धंसाव का दावा किया गया है।
मामला सामने आने के बाद प्रभावित हिस्से पर आवागमन रोक दिया गया और मरम्मत का काम शुरू कराया गया। सड़क की हालत को लेकर निर्माण की गुणवत्ता और विभागीय निगरानी पर सवाल उठने लगे हैं। खास बात यह है कि जिस परियोजना को जल्द लोकार्पित किए जाने की तैयारी है, उसमें निर्माण पूरा होने से पहले ही सड़क के क्षतिग्रस्त होने की तस्वीरें सामने आई हैं।
अब आया प्रशासनिक एक्शन: अमर उजाला की 8 सितंबर की रिपोर्ट के मुताबिक, सोशल मीडिया पर वीडियो सामने आने के बाद पीडब्ल्यूडी के एनएच विंग ने संबंधित ठेकेदार को नोटिस जारी किया है। ठेकेदार को एक सप्ताह में सड़क की मरम्मत करने के निर्देश दिए गए हैं और मरम्मत में आने वाली लागत का 20 प्रतिशत जुर्माने के तौर पर भरने को कहा गया है। अनुबंध के मुताबिक सड़क के रखरखाव की जिम्मेदारी ठेकेदार की 15 साल तक बताई गई है।
पीडब्ल्यूडी एनएच के अधिशासी अभियंता रवींद्र पाल सिंह के मुताबिक, सड़क पर पानी भरने और ड्रेनेज सिस्टम में खराबी के कारण दरारें आईं। उन्होंने क्षतिग्रस्त हिस्से की मरम्मत के निर्देश दिए हैं।
हालांकि, मामला केवल मरम्मत तक सीमित नहीं है। सड़क के बेस, मिट्टी की कंपैक्शन, निर्माण सामग्री, जल निकासी और गुणवत्ता परीक्षण की तकनीकी जांच भी जरूरी मानी जा रही है। एक अन्य रिपोर्ट में पुल की एप्रोच रोड के एक तरफ झुकने और सड़क के कई हिस्सों में गहरे धंसाव का भी दावा किया गया है।
क्या है राम वनगमन पथ परियोजना?
राम वनगमन पथ को अयोध्या से चित्रकूट तक करीब 210 किलोमीटर लंबे धार्मिक-पर्यटन कॉरिडोर के रूप में विकसित किया जा रहा है। परियोजना की लागत करीब 4,400 करोड़ रुपये बताई गई है। इसके जरिए अयोध्या, सुल्तानपुर, प्रतापगढ़, श्रृंगवेरपुर धाम, कौशांबी और चित्रकूट जैसे धार्मिक एवं ऐतिहासिक स्थलों को बेहतर सड़क संपर्क से जोड़ने की योजना है। परियोजना का शिलान्यास 2022 में हुआ था।
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यहां एक जरूरी सुधार भी है—आपकी शुरुआती हेडिंग में 400 करोड़ लिखा है, जबकि उपलब्ध ताजा रिपोर्टों के अनुसार परियोजना की लागत करीब 4,400 करोड़ रुपये है। इसलिए अपडेट खबर में 4,400 करोड़ का ही इस्तेमाल किया गया है।
अब बड़ा सवाल यह है कि क्या सिर्फ गड्ढे और दरारें भरने से मामला खत्म होगा, या सड़क के निर्माण की पूरी तकनीकी गुणवत्ता की स्वतंत्र जांच भी होगी? करोड़ों रुपये की इस धार्मिक-पर्यटन परियोजना के लोकार्पण से पहले सामने आई खराबी ने विभाग और निर्माण एजेंसी की निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
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