लखनऊ: उत्तर प्रदेश में करीब चार साल के लंबे इंतजार के बाद अब स्थायी पुलिस महानिदेशक (DGP) की नियुक्ति की प्रक्रिया निर्णायक मोड़ पर पहुंच गई है। राज्य सरकार ने सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुरूप वरिष्ठ IPS अधिकारियों की सूची संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) को भेज दी है। इस सूची में कुल 18 वरिष्ठ अधिकारियों के नाम शामिल हैं।
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सूत्रों के अनुसार, अब UPSC इन नामों की गहन समीक्षा करेगा। इसमें अधिकारियों की सीनियरिटी, सेवा रिकॉर्ड, अनुभव और प्रदर्शन को आधार बनाया जाएगा। समीक्षा के बाद आयोग तीन अधिकारियों का एक पैनल तैयार करेगा, जिसे अंतिम चयन के लिए राज्य सरकार को भेजा जाएगा।
कौन हैं प्रमुख दावेदार?
भेजी गई सूची में 1990 बैच की वरिष्ठ IPS अधिकारी रेणुका मिश्रा का नाम सबसे ऊपर बताया जा रहा है। इसके अलावा आलोक शर्मा, पीयूष आनंद और वर्तमान कार्यवाहक DGP राजीव कृष्णा भी इस पद की दौड़ में मजबूत दावेदार माने जा रहे हैं।
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सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइन का पालन
गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट ने राज्यों में DGP की नियुक्ति को लेकर स्पष्ट दिशा-निर्देश दिए हैं। इसके तहत:
- • UPSC द्वारा सुझाए गए पैनल में से ही चयन होगा
- • चयनित DGP का कार्यकाल न्यूनतम 2 वर्ष का होगा
- • प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी और मेरिट आधारित होगी
क्यों नहीं हो पा रही थी स्थायी नियुक्ति?
उत्तर प्रदेश में पिछले चार वर्षों से कार्यवाहक DGP के जरिए काम चलाया जा रहा था। इसके पीछे प्रशासनिक और कानूनी कारण बताए जाते रहे हैं। अब सूची UPSC को भेजे जाने के बाद स्थायी नियुक्ति की राह लगभग साफ मानी जा रही है।
आगे क्या?
अब सबकी नजर UPSC के फैसले पर टिकी है। आयोग द्वारा तैयार किए जाने वाले तीन नामों के पैनल के बाद ही यह तय होगा कि उत्तर प्रदेश पुलिस का अगला स्थायी मुखिया कौन होगा।
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निष्कर्ष:
अगर सब कुछ तय प्रक्रिया के अनुसार हुआ, तो जल्द ही उत्तर प्रदेश को नया स्थायी DGP मिल सकता है, जिससे पुलिस प्रशासन में स्थिरता और मजबूती आने की उम्मीद है।




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