8 साल बाद इंसाफ: कस्टडी में मौत पर दारोगा दोषी, 10 साल की सजा

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आगरा कस्टडी डेथ केस में बड़ा फैसला, थर्ड डिग्री पर कोर्ट सख्त

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आगरा। पुलिस कस्टडी में हुई मौत के बहुचर्चित मामले में आखिरकार 8 साल बाद न्याय का फैसला सामने आ गया है। अदालत ने दारोगा अनुज सिरोही को दोषी ठहराते हुए 10 साल की सजा सुनाई है। इस फैसले ने एक बार फिर पुलिसिया कार्रवाई पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

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मामला साल 2018 का है, जब चोरी के शक में राजू गुप्ता को पुलिस ने हिरासत में लिया था। आरोप है कि थाने में पूछताछ के दौरान उसके साथ बेरहमी से मारपीट की गई। 22 नवंबर 2018 को कस्टडी में ही उसकी मौत हो गई, जिससे पूरे इलाके में हड़कंप मच गया था।

 

परिजनों ने शुरू से ही पुलिस पर थर्ड डिग्री टॉर्चर का आरोप लगाया था। मामला बढ़ने पर जांच बैठी और लंबी कानूनी प्रक्रिया के बाद अब कोर्ट ने सख्त रुख अपनाते हुए आरोपी दारोगा को सजा सुनाई है।

अदालत ने अपने फैसले में साफ कहा कि पुलिस कस्टडी में किसी भी व्यक्ति की मौत बेहद गंभीर अपराध है और इसमें लिप्त अधिकारियों को बख्शा नहीं जा सकता।

👉 क्या है फैसले का मतलब?

  • कस्टडी डेथ मामलों में सख्त संदेश
  • पुलिस अत्याचार पर जीरो टॉलरेंस
  • पीड़ित परिवार को आंशिक न्याय

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यह फैसला साफ करता है कि कानून के रक्षक अगर कानून तोड़ेंगे, तो सजा तय है। पुलिस विभाग के लिए यह एक कड़ी चेतावनी है कि कार्रवाई हमेशा कानूनी दायरे में रहकर ही करनी होगी।

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