- इंश्योरेंस क्लेम और खनन मामले में रिश्वत लेने का आरोप
- CO जांच में आरोप सही, एंटी करप्शन से भी की गई थी शिकायत
न्यूज़ डेस्क
गोंडा। उत्तर प्रदेश पुलिस में भ्रष्टाचार के खिलाफ चल रही सख्त मुहिम के तहत एक और बड़ी कार्रवाई सामने आई है। 30 हजार रुपये रिश्वत लेने के आरोप में दरोगा और मुख्य आरक्षी को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। यह कार्रवाई आईजी देवीपाटन रेंज के निर्देश पर की गई, जिसमें जांच में आरोप सही पाए गए।
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मामला बहराइच जिले के मोतीपुर थाना क्षेत्र से जुड़ा है। आरोप है कि एक खनन से जुड़े प्रकरण और इंश्योरेंस क्लेम के मामले में आरोपी पक्ष से अवैध रूप से 30 हजार रुपये की मांग और वसूली की गई थी।
CO जांच में सही पाए गए आरोप
पीड़ित द्वारा मामले की शिकायत उच्च अधिकारियों से की गई थी, साथ ही एंटी करप्शन विभाग को भी शिकायत भेजी गई थी। इसके बाद प्रकरण की सीओ स्तर से जांच कराई गई, जिसमें प्रथम दृष्टया आरोप सही पाए गए।
जांच रिपोर्ट के आधार पर दरोगा अमरेश गिरी और मुख्य आरक्षी शैलेंद्र यादव को तत्काल सस्पेंड कर दिया गया।
आईजी का सख्त संदेश
आईजी देवीपाटन रेंज ने स्पष्ट संदेश दिया है कि
भ्रष्टाचार किसी भी स्तर पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। पुलिस की छवि खराब करने वालों के खिलाफ कड़ी से कड़ी कार्रवाई होगी।
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उन्होंने यह भी कहा कि आम जनता को यदि किसी भी पुलिसकर्मी द्वारा रिश्वत मांगे जाने या दबाव बनाए जाने की शिकायत हो, तो सीधे उच्च अधिकारियों या एंटी करप्शन विभाग से संपर्क करें।
एंटी करप्शन की भी नजर
सूत्रों के मुताबिक, मामले में एंटी करप्शन विभाग भी अलग से जांच कर सकता है। यदि आगे की जांच में पुख्ता सबूत सामने आते हैं, तो निलंबन के साथ विभागीय कार्रवाई और आपराधिक मुकदमा भी दर्ज हो सकता है।
पुलिस महकमे में हड़कंप
इस कार्रवाई के बाद पूरे पुलिस महकमे में हड़कंप मचा हुआ है। हाल के दिनों में लगातार हो रही कार्रवाई से साफ है कि वरिष्ठ अधिकारी अब भ्रष्टाचार पर जीरो टॉलरेंस की नीति अपना चुके हैं।




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