- संविदा कर्मचारियों के हक की लड़ाई: संतोष मिश्रा ने हाईकोर्ट में दी चुनौती, 3 फरवरी को होगा फैसला
- याचिका में राज्य सरकार और परिवहन विभाग पर संविदा कर्मचारियों के साथ भेदभाव का आरोप लगाया गया है।
- संतोष मिश्रा ने दलील दी कि संविदा कर्मचारियों से नियमित कर्मचारियों जैसा काम लिया जा रहा है, लेकिन अधिकार नहीं दिए जा रहे।
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न्यूज़ डेस्क
प्रयागराज।उत्तर प्रदेश में संविदा कर्मचारियों के अधिकारों को लेकर एक अहम कानूनी लड़ाई अब निर्णायक मोड़ पर पहुंच गई है। संविदा कर्मचारियों के हितों की आवाज़ उठाते हुए संतोष कुमार मिश्रा ने राज्य सरकार के खिलाफ इलाहाबाद हाईकोर्ट में चुनौती दी है। इस मामले में 3 फरवरी 2026 को अदालत का फैसला आने की उम्मीद है।
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कोर्ट नंबर-18 में सूचीबद्ध मामला
इलाहाबाद हाईकोर्ट की कोर्ट संख्या-18 में दर्ज इस याचिका में परिवहन विभाग से जुड़ा मामला उठाया गया है। याचिका संख्या WRIA-1156/2026 के तहत संतोष मिश्रा ने आरोप लगाया है कि सरकार संविदा कर्मचारियों के साथ भेदभावपूर्ण रवैया अपना रही है और उनके संवैधानिक अधिकारों का उल्लंघन हो रहा है।
सरकार के फैसलों पर सवाल
याचिका में कहा गया है कि समान कार्य के बावजूद संविदा कर्मचारियों को न तो स्थायित्व दिया जा रहा है और न ही नियमित कर्मचारियों के समान सुविधाएं। यह स्थिति संविधान के अनुच्छेद 14 और 16 की भावना के खिलाफ है।
हजारों कर्मचारियों की निगाहें फैसले पर
इस मामले का असर सिर्फ याचिकाकर्ता तक सीमित नहीं है, बल्कि प्रदेश के हजारों संविदा कर्मचारी इस फैसले की ओर उम्मीद भरी निगाहों से देख रहे हैं। यदि फैसला संविदा कर्मचारियों के पक्ष में आता है, तो यह सरकार की नीतियों पर बड़ा असर डाल सकता है।
3 फरवरी को साफ होगी तस्वीर
अब सबकी नजरें 3 फरवरी पर टिकी हैं, जब हाईकोर्ट यह तय करेगा कि संविदा कर्मचारियों के अधिकारों की अनदेखी संवैधानिक है या नहीं। यह फैसला प्रदेश की श्रम नीतियों की दिशा और दशा दोनों तय कर सकता है।
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