जजों पर दबाव का आरोप: इलाहाबाद हाईकोर्ट की यूपी पुलिस पर सख्त टिप्पणी, CJM ट्रांसफर तक की नौबत

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  • न्यायमूर्ति अरुण सिंह देशवाल ने कहा— मनमाफिक आदेश दिलाने की कोशिश ने बढ़ाई खींचतान
  • DGP राजीव कृष्णा ने कोर्ट को दिया प्रोटोकॉल पालन का भरोसा

न्यूज़ डेस्क 

प्रयागराज। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उत्तर प्रदेश पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर टिप्पणी करते हुए कहा है कि प्रदेश के कुछ पुलिस अधिकारी न्यायिक अधिकारियों पर मनमाफिक आदेश पारित कराने का दबाव बना रहे हैं। कोर्ट ने इसे न्यायपालिका की स्वतंत्रता के लिए गंभीर खतरा बताया है।

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मामले की सुनवाई कर रहे न्यायमूर्ति अरुण सिंह देशवाल ने कहा कि पुलिस और न्यायपालिका के बीच बढ़ती खींचतान को नियंत्रित करने के लिए एक मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (CJM) का तबादला करना पड़ा। कोर्ट ने कहा कि ऐसी स्थिति न्याय व्यवस्था की गरिमा को ठेस पहुंचाती है और इसे किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं किया जा सकता।

हाईकोर्ट की सख्त टिप्पणी के बाद उत्तर प्रदेश के पुलिस महानिदेशक (DGP) राजीव कृष्णा ने अदालत को भरोसा दिलाया कि सभी पुलिस अधिकारियों को न्यायिक प्रोटोकॉल, मर्यादा और सीमाओं का पालन करने के स्पष्ट निर्देश जारी किए जाएंगे। डीजीपी ने कहा कि भविष्य में किसी भी न्यायिक अधिकारी पर दबाव डालने की शिकायत सामने आई तो कठोर कार्रवाई की जाएगी।

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हाईकोर्ट ने इस आश्वासन को रिकॉर्ड पर लेते हुए स्पष्ट किया कि न्यायपालिका की स्वतंत्रता संविधान का मूल स्तंभ है और इसमें किसी भी प्रकार का हस्तक्षेप अस्वीकार्य है। कोर्ट ने संकेत दिए कि दोबारा ऐसी स्थिति बनी तो और कड़े कदम उठाए जा सकते हैं।

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