न्यूज़ डेस्क
देहरादून/लखनऊ।उत्तराखंड सरकार ने राज्यभर के संविदा, दैनिक वेतनभोगी और अन्य अस्थायी कर्मचारियों को बड़ी राहत देते हुए लंबे समय से लंबित चल रही नियमितीकरण की मांग को मंजूरी दे दी है। सरकार ने शुक्रवार को विनियमितीकरण (संशोधन) नियमावली-2025 की अधिसूचना जारी कर दी, जिससे लगभग सभी विभागों के हजारों कर्मचारियों को स्थायी नौकरी का रास्ता खुल गया है।यह निर्णय प्रदेश के प्रशासनिक ढांचे में एक बड़ा बदलाव माना जा रहा है और इसे कर्मचारियों के लिए “नए वर्ष का सबसे बड़ा तोहफ़ा” कहा जा रहा है।
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10 साल की निरंतर सेवा वालों को मिलेगा लाभ
जारी अधिसूचना के अनुसार, जिन कर्मचारियों ने अपने विभाग में लगातार 10 वर्ष तक सेवाएं दी हैं, वे अब नियमित नियुक्ति के लिए पात्र होंगे। इसमें निम्न सभी श्रेणियां शामिल हैं—
•दैनिक वेतनभोगी
•कार्यभारित कर्मचारी
•संविदा कर्मचारी
•नियत वेतन वाले कर्मचारी
•अंशकालिक कर्मचारी
•तदर्थ रूप से नियुक्त कर्मचारी
इन सभी वर्गों को पहली बार एक साथ नियमावली में शामिल किया गया है।
2013 की नियमावली में बड़ा संशोधन
सरकार ने विनियमितीकरण नियमावली-2013 को संशोधित करते हुए नई नियमावली-2025 लागू की है। संशोधन का उद्देश्य अस्थायी कर्मचारियों के भविष्य को सुरक्षित करना और विभागीय कार्यप्रणाली को स्थिर मानव संसाधन उपलब्ध कराना है।
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अधिसूचना में कहा गया है कि विभागों को नियमितीकरण प्रक्रिया को समयबद्ध रूप से पूरा करना होगा।
कैसे होगा नियमितीकरण? – प्रक्रिया स्पष्ट
अधिसूचना में सरकार ने नियमितीकरण की प्रक्रिया भी तय कर दी है:
1. सेवा रिकॉर्ड का सत्यापन
सबसे पहले कर्मचारियों की नियुक्ति तिथि से लेकर अब तक की सेवाओं का रिकॉर्ड चेक किया जाएगा। निरंतर सेवा की पुष्टि आवश्यक है।
2. विभागीय समिति की रिपोर्ट
प्रत्येक विभाग में गठित समितियां कर्मचारियों की पात्रता की जांच करेंगी और रिपोर्ट तैयार करेंगी।
3. रिक्त पदों पर समायोजन
जिन कर्मचारियों की पात्रता तय हो जाएगी, उन्हें विभागों में उपलब्ध रिक्त नियमित पदों पर समायोजित किया जाएगा।
4. क्रमवार सूची तैयार होगी
विभाग मेरिट और वरिष्ठता के आधार पर अंतिम सूची तैयार कर नियमितीकरण आदेश जारी करेंगे।
कर्मचारियों को मिलेंगे ये फायदे
नियमित होने के बाद कर्मचारियों को—
•स्थायी वेतनमान
•सामाजिक सुरक्षा
•पेंशन और अन्य लाभ
•छुट्टियों और अवकाश नियमों का लाभ
•पदोन्नति का अधिकार
•नौकरी की स्थिरता
जैसी सभी सुविधाएँ मिलेंगी, जो अब तक उन्हें नहीं मिल रही थीं।
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क्यों था जरूरी यह फैसला?
राज्य में बड़ी तादाद में कर्मचारी पिछले कई वर्षों से अस्थायी आधार पर काम कर रहे थे।
•कई संविदा कर्मियों ने 10 से 15 वर्षों तक सेवा दी है, लेकिन वे स्थाई नहीं हो पाए थे।
•कर्मचारी संगठनों द्वारा लगातार आंदोलन और ज्ञापन दिए जा रहे थे।
•विभागों में स्थाई कर्मचारियों की कमी से कार्यक्षमता प्रभावित हो रही थी।
सरकार का यह निर्णय इन सभी समस्याओं के समाधान की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है।
कर्मचारियों में खुशी की लहर, संगठनों ने किया स्वागत
अधिसूचना जारी होते ही कर्मचारी संगठनों ने इसे ऐतिहासिक फैसला बताया है। कई जगहों पर कर्मचारियों ने मिठाइयाँ बाँटकर खुशी व्यक्त की।
संगठनों का कहना है कि इस फैसले से हजारों परिवारों के जीवन में स्थिरता और सुरक्षा आएगी।
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सरकार की मंशा – कार्यप्रणाली में सुधार
सरकार का कहना है कि नियमितीकरण से विभागों में
•प्रशिक्षित कर्मियों की स्थायी उपलब्धता
•सेवा वितरण की गुणवत्ता में वृद्धि
•बेहतर जवाबदेही
•और प्रशासनिक स्थिरता
सुनिश्चित होगी।
उत्तर प्रदेश में नियमितीकरण की कितनी देर
प्रदेश में नियमितीकरण की मांग वर्षों से चल रही है, लेकिन हालात यह हैं कि 2001 तक सेवा शुरू करने वाले कई संविदा, दैनिक वेतन और कार्यभारित कर्मचारी भी आज तक नियमित नहीं हो पाए। विभागीय प्रक्रियाएँ, रिकॉर्ड का अभाव और शासन स्तर पर स्पष्ट दिशा न होने से नियमितीकरण की फाइलें वर्षों से अटकी हैं।कर्मचारियों का कहना है कि 20–22 साल तक काम करने के बाद भी उनकी सेवा अस्थायी ही है, जिससे न वेतनमान मिल पा रहा, न नौकरी की स्थिरता। कई बार शासन ने समितियाँ बनाई, रिपोर्ट मांगी, लेकिन जमीनी स्तर पर कार्यवाही आगे नहीं बढ़ सकी।इस देरी से कर्मचारियों में गहरी नाराज़गी है और अब वे प्रदेश सरकार से नियमितीकरण प्रक्रिया को पारदर्शी और समयबद्ध तरीके से लागू करने की मांग कर रहे हैं।
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उत्तर प्रदेश में सालों पहले 2001 तक नियमितीकरण की ख़बरें आई थीं,जो आज तक भी पूरी नहीं हो सकी।उत्तर प्रदेश की सरकार कर्मचारियों के प्रति कितनी जवाबदेही पूरा करती हैं,इस बात से ही पता चलता है । आज यहाँ लोग पूरी उम्र सेवा करने के बाद संविदा पर ही सेवानिवृत्त हो रहे हैं। संविदा पर ज़िम्मेदारियाँ तो खूब हैंपरंतु पैसा नाम का हैं। सरकार को जल्दी ही संविदा कर्मियों के बारे में भी सोचना चाहिए वर्ना प्रदेश के संविदा कर्मचारी आंदोलन के लिए बाध्य होंगे ।
संतोष कुमार मिश्र
महामंत्री
संविदा कर्मचारी एकता संघ,उ.प्र.रा.स.परिवहन निगम
निष्कर्ष
उत्तराखंड सरकार का यह फैसला न केवल हजारों कर्मियों के भविष्य को सुरक्षित करेगा, बल्कि राज्य की प्रशासनिक मशीनरी को और मजबूत बनाएगा। कई वर्षों से प्रतीक्षा कर रहे संविदा व अस्थायी कर्मियों के लिए यह अधिसूचना जीवन में स्थिरता का ऐतिहासिक अवसर लेकर आई है।
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