परिवहन निगम का उल्टा सिस्टम: जिसका जितना कम वेतन उसकी उतनी ज़्यादा कटौती

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  • वेतन कटौती में दोहरा सिस्टम, नियमित कर्मचारी पूरी तरह मुक्त
  •  संविदा और आउटसोर्सिंग कर्मियों पर सबसे अधिक आर्थिक दबाव
  • निगम पूरा भुगतान देता है, पर कर्मचारियों तक कटा हुआ पैसा—सिस्टम पर सवाल
  •  आउटसोर्सिंग एजेंसियों की मनमानी उजागर, भुगतान में भारी अंतर
  •  पुरुष–महिला परिचालकों की भर्ती में भी दोहरा मापदंड

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लखनऊ
। उत्तर प्रदेश राज्य सड़क परिवहन निगम (UPSRTC) में चालक–परिचालकों की भर्ती और वेतन संरचना को लेकर गंभीर अनियमितताएँ सामने आई हैं। नियमित कर्मचारियों पर जहां किसी प्रकार की कटौती नहीं होती, वहीं संविदा और आउटसोर्सिंग कर्मचारियों पर तीन गुना तक आर्थिक बोझ डाला जा रहा है। निगम द्वारा पूरा भुगतान किए जाने के बावजूद कर्मचारियों तक वही राशि कटकर पहुंचने से व्यवस्थागत भ्रष्टाचार के संकेत मिल रहे हैं।

कर्मचारियों का कहना है कि संविदा परिचालकों से 1000 रुपये तक और आउटसोर्सिंग कर्मियों से 3000 रुपये तक की कटौती की जाती है, जबकि उन्हें 2.02 पैसे और 1.75 पैसे प्रति किलोमीटर की दर से भुगतान किया जाता है। वही बस, वही रूट और वही जिम्मेदारी होने के बावजूद भुगतान में यह असमानता वर्षों से जारी है।

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सबसे गंभीर आरोप यह है कि निगम आउटसोर्सिंग एजेंसियों को पूरा भुगतान करता है, पर कर्मचारियों तक वेतन कटौती के बाद ही पहुंचता है। कर्मचारियों का कहना है कि “निगम भी पैसा दे रहा है और हमारी कमाई भी कट रही है—यह लूट इतनी बड़ी है कि बिना किसी स्तर की मिलीभगत के संभव ही नहीं।”

भर्ती में दोहरे मापदंड भी विवाद का कारण बन रहे हैं। पुरुष परिचालक मुख्य रूप से आउटसोर्सिंग पर, जबकि महिला परिचालक और चालक संविदा पर रखे जाते हैं। नियमित कर्मचारियों पर न लक्ष्य आधारित कटौती होती है, न लोड फैक्टर लागू होता है। यही व्यवस्था संविदा और आउटसोर्सिंग कर्मियों के लिए सबसे बड़ा बोझ बनी हुई है।

कर्मचारियों का कहना है कि लोड फैक्टर पूरा न होने पर संविदा कर्मियों से 1000 और आउटसोर्सिंग कर्मियों से 3000 रुपये तक काट लिए जाते हैं। नियमित कर्मचारियों पर यह नियम लागू न होना पूरे सिस्टम की पारदर्शिता पर सवाल खड़े करता है।

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मामला उठने पर अपर प्रबंध निदेशक ने कहा कि “यह तथ्य हमारे संज्ञान में नहीं था। यदि कहीं इस प्रकार की अनियमितता है तो वृहद स्तर पर जांच कराई जाएगी।” कर्मचारियों ने उच्च स्तरीय जांच, एक समान वेतन नीति और भुगतान सीधे कर्मचारी के खाते में देने की मांग की है।

UPSRTC के अंदर चल रही यह असमानता और एजेंसियों द्वारा की जा रही मनमानी अब खुलकर सामने आ चुकी है। समान काम के लिए अलग-अलग वेतन और अलग-अलग कटौती प्रणाली निगम की कार्यप्रणाली पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़ा करती है। कर्मचारी साफ कह रहे हैं कि “अब यह मामला केवल वेतन नहीं, बल्कि न्याय और पारदर्शिता की लड़ाई है।”

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दोहरे मापदंड: पुरुष परिचालक ही आउटसोर्सिंग में क्यों?

सूत्र बताते हैं कि UPSRTC में आउटसोर्सिंग के माध्यम से परिचालक भर्ती लगभग पूरी तरह पुरुषों तक सीमित है, जबकि महिला कर्मियों को मौका देने की नीति कागज़ों में ही दिखाई देती है।

  • चालकों और महिला कर्मियों को संविदा पर तैनात किया जाता है
  • मगर पुरुष परिचालकों को बड़ी संख्या में आउटसोर्सिंग में डाल दिया जाता है
  • इससे महिलाओं को बराबर अवसर नहीं मिलता
  • और पुरुष कर्मियों को स्थायी नियुक्ति या बेहतर अनुबंध का रास्ता बंद हो जाता है

कर्मचारी संगठनों का कहना है कि यह लैंगिक पक्षपात और रोज़गार असंतुलन दोनों पैदा कर रहा है।

UPSRTC की मौजूदा भर्ती व्यवस्था: तीन स्तर, तीन समस्याएँ

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UPSRTC में परिचालकों को तीन अलग-अलग प्रणालियों में रखा जाता है

  1. नियमित कर्मचारी – सबसे अधिक सुविधाएँ और नौकरी सुरक्षा
  2. संविदा कर्मचारी – सीमित सुरक्षा, वेतन में अनिश्चितता
  3. आउटसोर्सिंग कर्मचारी – सबसे कम सुरक्षा, कम वेतन, सबसे ज्यादा कटौती

कर्मचारियों का आरोप है कि यह व्यवस्था निगम में काम कर रहे कर्मचारियों को अलग-अलग श्रेणियों में बांटकर सस्ता श्रम कराने और असुरक्षित रोजगार देने का तरीका बन चुकी है।

समान काम लेकिन असमान वेतन: सबसे बड़ा विवाद

UPSRTC में परिचालक चाहे संविदा पर हों या आउटसोर्सिंग पर, दोनों का काम बिल्कुल एक जैसा है—

  •  यात्रियों से टिकट काटना
  •  कैश संभालना
  •  बस संचालन में ड्राइवर को सहायता
  •  यात्रियों की सुरक्षा
  •  रूट पूरा कराना
  •  आय बढ़ाना

लेकिन इसके वेतन में भारी अंतर देखने को मिलता है।

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वेतन संरचना में असमानता

  • संविदा परिचालक को: 2.02 पैसे प्रति यात्री आय
  • आउटसोर्सिंग परिचालक को: 1.75 पैसे प्रति यात्री आय

अर्थात, एक ही काम के बदले 15–20% तक कम भुगतान।

कर्मचारी कहते हैं कि यह “Equal Work – Unequal Pay” का स्पष्ट मामला है।

कटौती नीति: नियमित बनाम संविदा बनाम आउटसोर्सिंग – किस पर कितना बोझ?

UPSRTC में लोड फैक्टर और निर्धारित किमी पूरा न करने पर कटौती की व्यवस्था है, लेकिन यह व्यवस्था सभी पर समान रूप से लागू नहीं होती। यही अंतर पूरी प्रणाली पर सबसे बड़ा सवाल खड़ा करता है।

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1. नियमित कर्मचारी – पूर्ण रूप से कटौती से मुक्त

  • वही रूट, वही बस, वही लोड फैक्टर
  • लेकिन कोई कटौती नहीं
    किमी लक्ष्य  3000 लागू, न 50% लोड फैक्टर का दबाव

कर्मचारियों का कहना है कि इसी बिंदु पर सबसे बड़ी असमानता पैदा होती है—

जो नियम संविदा और आउटसोर्सिंग पर लागू हैं, वही नियमित कर्मचारियों पर लागू ही नहीं होते।

2. संविदा परिचालक – मध्यम स्तर का दंड

  • 5000 किमी कार्य
  • 22 दिन ड्यूटी
  • 50% से कम लोड फैक्टर
    ₹1000 कटौती

3. आउटसोर्सिंग परिचालक – सबसे कठोर दंड

  • वही 5000 किमी
  • वही 22 दिन
  • वही 50% लोड फैक्टर
    सीधी ₹3000 कटौती

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