परिचालकों का शोषण: अतिरिक्त काम का बोझ, प्रबंधन को सौंपा ज्ञापन

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  • दफ्तर में एआरएम स्तर से प्रशासनिक काम करवाए जाने से कर्मचारियों में रोष
  • ऑफिस वर्क के कारण बस संचालन और टिकटिंग व्यवस्था पर पड़ रहा असर
  • दर्जनों परिचालकों ने हस्ताक्षर कर लिखी अपनी बात, दखल की मांग तेज

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लखनऊ:उत्तर प्रदेश के परिवहन विभाग में परिचालकों पर अनुचित दबाव और अतिरिक्त कार्य थोपे जाने का मामला तेजी से उभरकर सामने आया है। कर्मचारियों ने लिखा-पढ़ी के साथ एक विस्तृत शिकायतपत्र विभागीय अधिकारियों को सौंपते हुए कहा है कि उन्हें अपने नियमित कार्य—यात्रियों को टिकट वितरण, किराया संग्रहण और यात्रा अनुशासन—के अलावा एआरएम स्तर से प्रशासनिक कार्य भी जबरन करवाए जा रहे हैं।

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शिकायतपत्र में परिचालकों ने दावा किया कि प्रशासनिक अधिकारियों द्वारा कई ऐसे कार्य सौंपे जाते हैं जो परिचालक पद के कार्यक्षेत्र में नहीं आते, मगर दबाव, धमकी और मनमानी के चलते वे इन कामों को करने को मजबूर हैं।

नियत ड्यूटी छोड़ कर कराए जा रहे दफ्तर के काम

शिकायत में बताया गया कि अधिकारियों के निर्देश पर परिचालकों से दफ्तर में

  • रजिस्टर एंट्री,
  • रिपोर्ट तैयार करना,
  • विभागीय कागज़ात संभालना,
  • निरीक्षण से संबंधित दस्तावेज तैयार कराना

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जैसे कार्य करवाए जा रहे हैं। कर्मचारी कहते हैं कि ये काम उनकी मूल ड्यूटी से बिल्कुल इतर हैं, जिससे न सिर्फ उनकी नियमित सेवा प्रभावित होती है बल्कि मानसिक दबाव भी अत्यधिक बढ़ जाता है।

हमारी ड्यूटी बसों में है… दफ्तर में नहीं” — कर्मियों की पीड़ा

कर्मचारियों ने पत्र में लिखा है कि बस परिचालक का काम यात्रियों की सुविधा सुनिश्चित करना, टिकट वितरण और रूट संचालन को सुचारू रखना है। लेकिन उन्हें ऑफिस के कामों में उलझा दिया जाता है, जिसके कारण उनका मूल कार्य प्रभावित होता है और यात्रियों को भी परेशानी उठानी पड़ती है।

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कर्मचारियों ने आरोप लगाया कि यदि वे इन अतिरिक्त कार्यों का विरोध करते हैं, तो उन्हें

  • प्रताड़ित करने,
  • डांटने-फटकारने,
  • संविदा समाप्ति जैसी  धमकी

जैसी बातें की जाती हैं।

कर्मचारियों में गहरा आक्रोश, कईयों ने की हस्ताक्षर के साथ शिकायत

पत्र के नीचे बड़ी संख्या में कर्मचारियों के हस्ताक्षर दिखते हैं, जो स्पष्ट करते हैं कि यह समस्या व्यापक और गंभीर है। कामगारों ने कहा कि यह स्थिति अब असहनीय हो चुकी है और विभाग को तुरंत दख़ल देना चाहिए।

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“हम परिचालक हैं, प्रशासनिक अधिकारी नहीं”— कर्मचारियों की दो-टूक

उन्होंने कहा कि विभाग की कमी या स्टाफ की कमी का बोझ परिचालकों पर डालना न सिर्फ अनुचित है, बल्कि श्रम कानूनों के भी विपरीत है।

कर्मचारी मांग कर रहे हैं कि:

  • दफ्तर के काम के लिए अलग स्टाफ नियुक्त हो,
  • परिचालकों को केवल उनकी निर्धारित ड्यूटी ही दी जाए,
  • किसी भी अतिरिक्त कार्य के लिए लिखित आदेश और भत्ता दिया जाए,
  • उत्पीड़न करने वाले अधिकारियों पर कार्रवाई की जाए।

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प्रबंधन की खामियां उजागर — सिस्टम में सुधार की मांग तेज

यह मामला परिवहन विभाग में काम के असंतुलन, स्टाफ प्रबंधन की खामियों, और निचले स्तर के कर्मचारियों पर अत्यधिक दबाव जैसे गंभीर मुद्दों को उजागर करता है।

यदि विभाग ने समय रहते इन समस्याओं को नहीं सुलझाया, तो आने वाले दिनों में विरोध तेज होने की संभावना है।

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