पटना/मोकामा:बिहार की राजनीति में जब भी “बाहुबली नेताओं” की बात होती है, तो एक नाम सबसे पहले सामने आता है — अनंत सिंह, जिन्हें लोग छोटे सरकार के नाम से जानते हैं। इस बार फिर से बिहार विधानसभा चुनावों में उनका नाम सुर्खियों में है। आइए जानते हैं आखिर कौन हैं अनंत सिंह, और क्यों वे हर चुनाव में चर्चा के केंद्र में रहते हैं।
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गांव से राजनीति तक का सफर
अनंत सिंह का जन्म पटना जिले के बाढ़ उपखंड के लखो गांव में हुआ था। साधारण परिवार से आने वाले अनंत सिंह ने अपनी ताकत, जुझारूपन और जनसंपर्क से मोकामा में अपना दबदबा बनाया। उन्होंने गरीबों की मदद और अन्याय के खिलाफ खड़े होकर लोगों का दिल जीता।
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“छोटे सरकार” की पहचान
मोकामा क्षेत्र में अनंत सिंह को “छोटे सरकार” कहा जाता है। उनकी यह पहचान एक ओर जहां उन्हें जनता का प्रिय बनाती है, वहीं कई विवादों से भी जोड़ती है। लोगों के बीच उनकी छवि एक रॉबिनहुड जैसी है — जो अपने लोगों की हर स्थिति में मदद करता है।
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राजनीतिक करियर की शुरुआत
- अनंत सिंह ने राजनीति में कदम जद(यू) से रखा था।
- 2005 और 2010 में वे जद(यू) से विधायक चुने गए।
- बाद में नीतीश कुमार से मतभेद के बाद उन्होंने पार्टी छोड़ी।
- 2015 में निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में चुनाव जीतकर फिर विधानसभा पहुंचे।
- 2020 में उन्होंने राजद (RJD) से चुनाव लड़कर जीत हासिल की।
विवादों और मुकदमों से घिरी राह
अनंत सिंह का नाम कई गंभीर मामलों में दर्ज रहा है —
- उनके घर से AK-47 और ग्रेनेड बरामदगी का मामला सबसे चर्चित रहा।
- 2022 में पटना की अदालत ने उन्हें आर्म्स एक्ट में 10 साल की सजा सुनाई।
- फिलहाल वे जेल में हैं, लेकिन उनकी राजनीतिक पकड़ बरकरार है।
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नीलम देवी बनीं राजनीतिक वारिस
2022 के उपचुनाव में अनंत सिंह की पत्नी नीलम देवी ने राजद के टिकट पर मोकामा सीट जीती।
2025 के चुनावों में भी उम्मीद जताई जा रही है कि वे ही राजद की प्रत्याशी होंगी।
माना जा रहा है कि यह मुकाबला नीलम देवी (राजद) बनाम एनडीए उम्मीदवार के बीच दिलचस्प रहेगा।
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जनता में आज भी लोकप्रिय
मोकामा और बाढ़ क्षेत्र में अनंत सिंह आज भी बेहद लोकप्रिय हैं।
गांव के गरीब और मजदूर वर्ग उन्हें अपना नेता मानते हैं।
विरोधी उन्हें “बाहुबली” कहते हैं, लेकिन समर्थक उन्हें जनता का मसीहा मानते हैं।
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चुनावी चर्चा का केंद्र
बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में मोकामा सीट फिर से सबसे हॉट सीट मानी जा रही है।
अनंत सिंह के नाम से ही विरोधियों में हलचल है।
राजद भी उनके जनाधार का फायदा उठाने की रणनीति में है।
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निष्कर्ष
अनंत सिंह बिहार की राजनीति का वह चेहरा हैं जो विवादों में रहकर भी जनप्रिय हैं।
जेल में रहते हुए भी उनके नाम से मोकामा की सियासत गर्म रहती है।
छोटे सरकार की लोकप्रियता बिहार की राजनीति में एक अलग अध्याय बन चुकी है।



