- खाद्य एवं औषधि आयुक्त रोशन जैकब ने सख्त निगरानी का आदेश जारी किया
लखनऊ। कोडीनयुक्त कफ सिरप की अनियंत्रित बिक्री और दुरुपयोग पर लगाम कसने के लिए उत्तर प्रदेश सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। खाद्य एवं औषधि आयुक्त रोशन जैकब ने सभी मंडलायुक्तों और जिलाधिकारियों को पत्र जारी कर इन दवाओं की बिक्री और निगरानी को लेकर कड़े निर्देश दिए हैं। अब यह सिरप सिर्फ पंजीकृत डॉक्टर की वैध प्रिस्क्रिप्शन पर ही उपलब्ध होगा।
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क्या हैं नए नियम?
सरकार ने कोडीनयुक्त कफ सिरप को लेकर कई सख्त निर्देश लागू किए हैं:
1. प्रिस्क्रिप्शन अनिवार्य
- सिरप केवल डॉक्टर की पर्ची दिखाने पर मिलेगा।
- मेडिकल स्टोर को मरीज की पूरी जानकारी और प्रिस्क्रिप्शन की कॉपी रिकॉर्ड में रखनी होगी।
2. बिक्री और भंडारण का पूरा रिकॉर्ड अनिवार्य
- प्रत्येक बोतल की बिक्री का विवरण रजिस्टर में दर्ज होगा।
- स्टॉक आने और खत्म होने का पूरा हिसाब रखना होगा।
3. आवासीय भवन में भंडारण होगा अपराध
- किसी भी मेडिकल स्टोर या सप्लाई चेन में आवासीय भवन में स्टॉक रखने पर लाइसेंस तत्काल रद्द किया जाएगा।
- अवैध भंडारण पर मुकदमा भी दर्ज हो सकता है।
4. निरीक्षण होगा डिजिटल – जियो टैगिंग अनिवार्य
- निरीक्षण के दौरान अधिकारी स्टोर का जियो टैगिंग सहित फोटो अपलोड करेंगे।
- यह सिस्टम पारदर्शिता सुनिश्चित करेगा और लोकेशन आधारित मॉनिटरिंग आसान होगी।
5. अनियमितता पर सख़्त कार्रवाई
- बिना प्रिस्क्रिप्शन बिक्री, नकली रिकॉर्ड या अवैध स्टॉक मिलने पर लाइसेंस निलंबन/रद्द करने का प्रावधान।
क्यों ज़रूरी पड़े ये सख्त कदम?
पिछले कुछ समय से कोडीन आधारित सिरप का दुरुपयोग बढ़ा है। इसकी नशे की प्रवृत्ति के कारण युवाओं में यह प्रतिबंधित पदार्थ की तरह इस्तेमाल होने लगा था। कई जिलों से शिकायतें थीं कि बिना पर्चे के बड़ी मात्रा में बिक्री की जा रही है।
सरकार का उद्देश्य
- दुरुपयोग रोकना
- अवैध सप्लाई चेन खत्म करना
- मेडिकल स्टोर्स पर निगरानी बढ़ाना
- मरीजों को सुरक्षित और नियंत्रित दवा उपलब्ध कराना
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- अधिकारी क्या कहते हैं?
आयुक्त रोशन जैकब ने स्पष्ट किया कि
“कोडीनयुक्त दवाओं पर नियंत्रण जरूरी है। किसी भी स्तर पर ढिलाई बर्दाश्त नहीं की जाएगी। मॉनिटरिंग पूरी तरह डिजिटल मोड में होगी।”
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निष्कर्ष
यह आदेश प्रदेश में कोडीन आधारित कफ सिरप की बिक्री को नियंत्रित करने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है। नई व्यवस्था लागू होते ही मेडिकल स्टोर्स की जवाबदेही बढ़ेगी और अवैध कारोबार पर अंकुश लगेगा।




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