- 10 कोच, करीब 2,600 यात्रियों की क्षमता; जलवाष्प होगा मुख्य उत्सर्जन
नई दिल्ली/जींद। भारतीय रेलवे ने हरित और स्वच्छ रेल परिवहन की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए देश की पहली स्वदेशी हाइड्रोजन फ्यूल-सेल ट्रेन को जींद–सोनीपत रेलखंड पर उतार दिया है। भारतीय रेलवे ने मई 2026 में इस 10 कोच वाली ट्रेन को इस सेक्शन पर चलाने की मंजूरी दी थी। बाद में 17 जुलाई 2026 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जींद से ट्रेन को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया।
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डीजल की जगह हाइड्रोजन, प्रदूषण में बड़ी कमी
रेल मंत्रालय के मुताबिक ट्रेन हाइड्रोजन और ऑक्सीजन की रासायनिक प्रतिक्रिया से ट्रेन में बिजली पैदा करती है। इसके परिणामस्वरूप मुख्य उप-उत्पाद के तौर पर जलवाष्प निकलता है, जबकि पारंपरिक डीजल इंजन की तरह धुआं और टेलपाइप कार्बन उत्सर्जन नहीं होता।
75 किमी प्रति घंटे की अधिकतम रफ्तार
ट्रेन में 10 कोच हैं और इसकी यात्री क्षमता करीब 2,600 बताई गई है। इसे अधिकतम 75 किमी प्रति घंटे की गति से चलाने की मंजूरी मिली है, जबकि ट्रेन की डिजाइन गति 110 किमी प्रति घंटे है। यह जींद, गोहाना और सोनीपत के बीच कई स्टेशनों को जोड़ेगी।
जींद में ट्रेन के लिए देश की पहली समर्पित हाइड्रोजन भंडारण और रिफ्यूलिंग सुविधा भी विकसित की गई है। रेल मंत्रालय के अनुसार जुलाई के अंत तक ट्रेन 1,200 किलोमीटर से अधिक चल चुकी थी और इससे 3,200 लीटर से ज्यादा डीजल की बचत हुई।
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खास बात: हाइड्रोजन ट्रेन के सफल परिचालन के साथ भारत उन चुनिंदा देशों की श्रेणी में शामिल हो गया है, जो हाइड्रोजन आधारित रेल परिवहन तकनीक का इस्तेमाल कर रहे हैं।


