- कुड़िया घाट के पास खून से लथपथ मिले अज्ञात घायल को हिमालय मिश्रा ने पहुंचाया KGMU, तमाशबीनों की भीड़ के बीच पेश की इंसानियत की मिसाल
- हादसे के बाद घायल को अस्पताल पहुंचाने दौड़े हिमालय मिश्रा, KGMU ट्रॉमा सेंटर में स्ट्रेचर और इलाज की व्यवस्था पर उठाए गंभीर सवाल
- पहचान तक नहीं जानते थे, फिर भी मदद के लिए आगे आए हिमालय मिश्रा; एंबुलेंस से लेकर अस्पताल में भर्ती कराने तक निभाई जिम्मेदारी
- सड़क पर घायल तड़पता रहा और लोग देखते रहे, हिमालय मिश्रा ने दिखाई संवेदनशीलता; अस्पताल पहुंचने के बाद व्यवस्था को लेकर जताई नाराजगी
कुड़िया घाट के पास देर रात हादसा, ‘प्रबल पुरुषार्थ’ के लेखक हिमालय मिश्रा ने दिखाई इंसानियत; KGMU ट्रॉमा सेंटर की व्यवस्था पर उठे सवाल
लखनऊ। राजधानी लखनऊ में मानवता की मिसाल पेश करने वाली एक घटना सामने आई है। कुड़िया घाट क्षेत्र से रात करीब 10 बजे लौट रहे ‘प्रबल पुरुषार्थ’ पुस्तक के लेखक हिमालय मिश्रा ने रास्ते में एक अज्ञात व्यक्ति को सड़क हादसे के बाद गंभीर हालत में पड़ा देखा।
बताया गया कि घायल व्यक्ति के सिर से काफी खून बह रहा था और उसकी हालत बेहद गंभीर थी। मौके पर कई लोग मौजूद थे, लेकिन अधिकांश लोग मदद के लिए आगे आने के बजाय तमाशबीन बने रहे।
ऐसे में हिमालय मिश्रा ने बिना किसी पहचान या परिचय के घायल व्यक्ति की मदद करने का फैसला किया। उन्होंने तत्काल एंबुलेंस सेवा को फोन किया और घायल को इलाज के लिए KGMU ट्रॉमा सेंटर, लखनऊ पहुंचाया। हिमालय मिश्रा स्वयं भी उसके साथ अस्पताल पहुंचे और भर्ती कराने की प्रक्रिया में जुटे रहे।
स्ट्रेचर नहीं मिला, इलाज से इनकार करने का गंभीर आरोप
हिमालय मिश्रा का आरोप है कि ट्रॉमा सेंटर पहुंचने के बाद घायल व्यक्ति की हालत गंभीर होने के बावजूद उन्हें पर्चा बनवाने और भर्ती कराने में काफी परेशानियों का सामना करना पड़ा। उनका कहना है कि अस्पताल में घायल मरीज को ले जाने के लिए तत्काल स्ट्रेचर उपलब्ध नहीं था।
हिमालय मिश्रा ने यह भी गंभीर आरोप लगाया कि स्ट्रेचर की व्यवस्था न होने की स्थिति में डॉक्टरों ने घायल व्यक्ति का इलाज शुरू करने से मना कर दिया। उनका दावा है कि मरीज की गंभीर हालत को देखते हुए उन्होंने लगातार मदद की गुहार लगाई और किसी तरह घायल को भर्ती कराने की व्यवस्था की।
गंभीर रूप से घायल अज्ञात व्यक्ति के सिर से खून बह रहा था और समय पर उपचार की जरूरत थी। ऐसे में अस्पताल की व्यवस्था को लेकर हिमालय मिश्रा ने सवाल खड़े किए हैं।
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नाम तक नहीं जानते थे, फिर भी बचाने दौड़ पड़े
घटना की सबसे महत्वपूर्ण बात यह रही कि हिमालय मिश्रा घायल व्यक्ति को जानते तक नहीं थे और उसकी पहचान भी उस समय स्पष्ट नहीं थी। इसके बावजूद उन्होंने मानवता का परिचय देते हुए उसे सड़क से अस्पताल तक पहुंचाने और भर्ती कराने के लिए हर संभव प्रयास किया।
जहां सड़क पर मौजूद लोग तमाशबीन बने रहे, वहीं ‘प्रबल पुरुषार्थ’ के लेखक हिमालय मिश्रा ने एक अज्ञात घायल व्यक्ति की जान बचाने के लिए आगे बढ़कर सामाजिक जिम्मेदारी की मिसाल पेश की।
अस्पताल प्रशासन का पक्ष आना बाकी
KGMU ट्रॉमा सेंटर के डॉक्टरों और अस्पताल व्यवस्था को लेकर लगाए गए इन आरोपों पर अस्पताल प्रशासन का आधिकारिक पक्ष सामने आना बाकी है। प्रशासन या संबंधित चिकित्सकों का पक्ष मिलने के बाद मामले को और स्पष्ट रूप से अपडेट किया जाएगा।
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यह घटना एक बड़ा सवाल छोड़ती है—जब सड़क पर कोई अजनबी किसी घायल की जान बचाने के लिए आगे आ सकता है, तो अस्पताल पहुंचने के बाद गंभीर मरीज को तत्काल इलाज और आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराने में देरी क्यों हो?





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