पूर्व RBI गवर्नर ने विकास दर के आंकड़ों पर जताई चिंता, निवेश और FDI को लेकर भी उठाए सवाल
नई दिल्ली। भारत की आर्थिक विकास दर को लेकर रिजर्व बैंक के पूर्व गवर्नर रघुराम राजन ने गंभीर सवाल खड़े किए हैं। एक इंटरव्यू में राजन ने पूछा कि अगर भारतीय अर्थव्यवस्था वास्तव में इतनी तेज गति से बढ़ रही है, तो देश के युवाओं के लिए पर्याप्त संख्या में नौकरियां क्यों नहीं पैदा हो रही हैं? उन्होंने विकास दर के आंकड़ों की विश्वसनीयता पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि तेज आर्थिक वृद्धि के दावों के बावजूद रोजगार और निवेश के मोर्चे पर दिखाई दे रही विसंगतियों को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
राजन ने कहा कि अर्थव्यवस्था की तेज ग्रोथ के साथ रोजगार के अवसरों और निजी निवेश में भी वृद्धि दिखाई देनी चाहिए। लेकिन मौजूदा स्थिति में कई सवाल खड़े हो रहे हैं। उन्होंने पूछा कि यदि विकास वास्तव में इतनी तेज है तो अच्छी नौकरियां पर्याप्त संख्या में क्यों नहीं बन रही हैं और निजी निवेश में अपेक्षित तेजी क्यों नहीं दिखाई दे रही है?
विकास दर के आंकड़ों पर सवाल
पूर्व RBI गवर्नर ने कहा कि विकास के आंकड़ों को लेकर कुछ वास्तविक चिंताएं हैं। उनके मुताबिक, अगर आंकड़े वास्तविक आर्थिक स्थिति को सही तरीके से प्रतिबिंबित नहीं कर रहे हैं तो इससे पूरी अर्थव्यवस्था की तस्वीर को लेकर संदेह पैदा हो सकता है।
उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि भारतीय उद्योगपति निवेश करने में हिचकिचाहट क्यों दिखा रहे हैं और प्रत्यक्ष विदेशी निवेश यानी FDI बड़े पैमाने पर क्यों नहीं आ रहा है।
युवाओं के रोजगार पर सबसे बड़ी चिंता
रघुराम राजन की सबसे बड़ी चिंता भारत के ‘पॉपुलेशन डिविडेंड’ को लेकर है। भारत में बड़ी युवा आबादी को आर्थिक ताकत में बदलने के लिए पर्याप्त रोजगार के अवसर पैदा करना जरूरी है।
उनका कहना है कि यदि देश अपनी युवा आबादी के लिए पर्याप्त और अच्छी गुणवत्ता वाली नौकरियां पैदा नहीं कर पाता है तो भारत के पास मौजूद जनसांख्यिकीय लाभांश को गंवाने का खतरा पैदा हो सकता है।
सरकार की नीतियों पर भी सवाल
राजन ने यह भी सवाल उठाया कि क्या सरकार युवाओं के लिए ज्यादा नौकरियां पैदा करने के लिए पर्याप्त कदम उठा रही है। साथ ही उन्होंने यह जानने की जरूरत बताई कि जिन क्षेत्रों में भारत पहले से मौजूद है, वहां वैश्विक स्तर पर अपनी स्थिति मजबूत रखने के लिए क्या रणनीति अपनाई जा रही है।
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राजन के सवालों ने एक बार फिर भारत की आर्थिक वृद्धि की गुणवत्ता पर बहस छेड़ दी है। तेज GDP ग्रोथ के साथ रोजगार, निवेश, उत्पादकता और आय में समान रूप से बढ़ोतरी हो रही है या नहीं—यह सवाल अब आर्थिक बहस के केंद्र में है।





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