- 1. चुनाव में बरामद अवैध नकदी सिर्फ जब्ती तक सीमित नहीं, स्रोत और इस्तेमाल की जांच भी जरूरी
- 2. चुनावी आपराधिक मामलों को वापस लेने के लिए हाईकोर्ट की मंजूरी जरूरी, धनबल पर लगाम की कोशिश
नई दिल्ली। चुनावी प्रक्रिया में काले धन के इस्तेमाल को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है। सोमवार को सुनवाई के दौरान शीर्ष अदालत ने कहा कि चुनाव में इस्तेमाल होने वाला बेहिसाब या अवैध धन लोकतंत्र, कानून के शासन और पूरी चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता को प्रभावित करता है। अदालत ने चुनाव के दौरान जब्त किए गए अवैध धन से जुड़े आपराधिक मामलों की जांच और सुनवाई को समयबद्ध तरीके से पूरा करने पर जोर दिया।
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अदालत ने यह स्पष्ट किया कि चुनाव के दौरान बड़ी मात्रा में नकदी या अन्य अवैध धन की बरामदगी केवल जब्ती तक सीमित मामला नहीं है। यदि बरामद धन किसी आपराधिक गतिविधि या चुनावी प्रक्रिया को प्रभावित करने के उद्देश्य से इस्तेमाल किया जा रहा था, तो उसके स्रोत और इस्तेमाल की जांच भी जरूरी है।
सुप्रीम कोर्ट ने ऐसे मामलों में जांच एजेंसियों और संबंधित अधिकारियों से तेजी से कार्रवाई की अपेक्षा जताई। अदालत का मानना है कि चुनावी प्रक्रिया में धनबल की भूमिका बढ़ने से समान अवसर का सिद्धांत प्रभावित होता है। आर्थिक रूप से मजबूत उम्मीदवार यदि अवैध धन के सहारे चुनावी प्रतिस्पर्धा को प्रभावित करते हैं तो इससे लोकतांत्रिक व्यवस्था की विश्वसनीयता पर सीधा असर पड़ता है।
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अदालत ने चुनाव से जुड़े आपराधिक मामलों को वापस लेने को लेकर भी महत्वपूर्ण दिशा-निर्देश दिए हैं। ऐसे मामलों को वापस लेने के लिए हाईकोर्ट की मंजूरी की आवश्यकता बताई गई है। इससे राजनीतिक दबाव में मामलों को खत्म किए जाने की संभावना पर अंकुश लगाने की कोशिश मानी जा रही है।
सुप्रीम कोर्ट की सख्ती ऐसे समय आई है जब चुनावों में नकदी, मुफ्त उपहार और अन्य आर्थिक प्रलोभनों को लेकर लगातार सवाल उठते रहे हैं। अदालत के निर्देशों का असर आने वाले चुनावों में जांच और कार्रवाई की प्रक्रिया पर दिखाई दे सकता है।





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