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नई दिल्ली। देश की राजनीति में आपराधिक मामलों की मौजूदगी को लेकर सुप्रीम कोर्ट में दाखिल ताजा रिपोर्ट ने गंभीर तस्वीर सामने रखी है। वरिष्ठ अधिवक्ता और न्यायमित्र विजय हंसारिया की ओर से अदालत के समक्ष पेश स्थिति रिपोर्ट के अनुसार देश के 326 मौजूदा सांसदों के खिलाफ आपराधिक मामले लंबित हैं। इनमें लोकसभा के 251 और राज्यसभा के 75 सदस्य शामिल हैं। इसके अलावा 28 राज्यों में से 14 राज्यों के मुख्यमंत्रियों ने भी अपने खिलाफ आपराधिक मामलों की घोषणा की है। रिपोर्ट में जनप्रतिनिधियों के खिलाफ लंबित मामलों की संख्या चार हजार से अधिक बताई गई है। https://www.facebook.com/share/r/19NkWmi3qL/
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सुप्रीम कोर्ट में यह मामला इसलिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि जनप्रतिनिधियों के खिलाफ दर्ज आपराधिक मामलों का लंबे समय तक लंबित रहना न्याय व्यवस्था और लोकतांत्रिक जवाबदेही दोनों पर सवाल खड़े करता है। रिपोर्ट में गंभीर आपराधिक मामलों और उनके तेजी से निस्तारण की आवश्यकता पर भी ध्यान दिलाया गया है।
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अदालत पहले भी सांसदों और विधायकों के खिलाफ लंबित आपराधिक मामलों की सुनवाई तेज करने के निर्देश दे चुकी है। अब ताजा रिपोर्ट में सामने आए आंकड़े राजनीतिक दलों के लिए भी चुनौती हैं, क्योंकि चुनाव के दौरान उम्मीदवारों की आपराधिक पृष्ठभूमि मतदाताओं के सामने आती है, लेकिन मुकदमों का अंतिम फैसला लंबे समय तक नहीं हो पाता।
विशेषज्ञों का मानना है कि जनप्रतिनिधियों के खिलाफ गंभीर मामलों में समयबद्ध जांच और सुनवाई
लोकतांत्रिक व्यवस्था में जनता का विश्वास मजबूत करने के लिए जरूरी है। सुप्रीम कोर्ट में दाखिल रिपोर्ट ने राजनीतिक दलों के टिकट वितरण और आपराधिक पृष्ठभूमि वाले उम्मीदवारों को लेकर एक बार फिर बहस तेज कर दी है।





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