- समय से वेतन, EPF-ESI जमा कराने और आउटसोर्स एजेंसियों की जवाबदेही तय करने की मांग; 2012 से पहले के समायोजन का दिया हवाला
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लखनऊ। उत्तर प्रदेश राज्य सड़क परिवहन निगम (UPSRTC) में विभिन्न आउटसोर्स एजेंसियों के माध्यम से कार्यरत परिचालकों ने समय से वेतन भुगतान, कर्मचारी भविष्य निधि (EPF) और कर्मचारी राज्य बीमा (ESI) की धनराशि नियमानुसार जमा कराने के साथ ही प्रदेश के सभी आउटसोर्स पुरुष परिचालकों को सीधे विभागीय अनुबंध पर समायोजित किए जाने की मांग उठाई है।
इस संबंध में उत्तर प्रदेश राज्य सड़क परिवहन निगम के प्रबंध निदेशक को ज्ञापन सौंपते हुए परिचालकों ने आरोप लगाया कि निगम के विभिन्न क्षेत्रों और डिपो में हजारों आउटसोर्स परिचालक सेवाएं दे रहे हैं और निगम के राजस्व में लगातार योगदान भी कर रहे हैं। इसके बावजूद कई कर्मचारियों को समय से वेतन नहीं मिल रहा है और EPF तथा ESI अंशदान को लेकर भी अनियमितताओं की शिकायतें सामने आ रही हैं।

ज्ञापन में कहा गया है कि आउटसोर्स एजेंसियों और परिवहन निगम के बीच हुए अनुबंध के तहत एजेंसियों की जिम्मेदारी है कि कर्मचारियों को समय पर वेतन, EPF, ESI और अन्य वैधानिक सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं। परिचालकों का आरोप है कि कुछ एजेंसियों द्वारा अनुबंध की शर्तों का कथित रूप से पालन नहीं किया जा रहा, जिससे कर्मचारियों के आर्थिक हित और सामाजिक सुरक्षा प्रभावित हो रही है।
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वेतन, EPF और ESI की नियमित निगरानी की मांग
आउटसोर्स परिचालकों ने मांग की है कि सभी एजेंसियों को प्रत्येक माह निर्धारित तिथि तक वेतन भुगतान के लिए बाध्य किया जाए। साथ ही कर्मचारियों के EPF और ESI अंशदान को नियमानुसार समयबद्ध तरीके से जमा कराने की नियमित निगरानी की जाए।
ज्ञापन में EPF और ESI जमा होने की ऑनलाइन सत्यापन व्यवस्था लागू करने की भी मांग की गई है, ताकि कर्मचारी स्वयं अपने अंशदान की स्थिति की जानकारी प्राप्त कर सकें।
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अनुबंध उल्लंघन करने वाली एजेंसियों पर कार्रवाई की मांग
परिचालकों ने कहा कि जिन आउटसोर्स एजेंसियों द्वारा अनुबंध की शर्तों का उल्लंघन किया जा रहा है, उन्हें कारण बताओ नोटिस जारी किया जाए। अनुबंध की शर्तों के अनुसार दंडात्मक कार्रवाई की जाए और गंभीर मामलों में संबंधित एजेंसियों का अनुबंध निरस्त करने पर भी विचार किया जाए।
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ज्ञापन में यह भी मांग की गई है कि कर्मचारियों के वेतन, EPF और ESI भुगतान की जवाबदेही केवल आउटसोर्स एजेंसी तक सीमित न रहे, बल्कि संबंधित विभागीय अधिकारियों की जिम्मेदारी भी तय की जाए।
एजेंसियों के अनुबंध विस्तार से पहले हो समीक्षा
परिचालकों ने मांग रखी कि किसी भी आउटसोर्स एजेंसी के अनुबंध का विस्तार करने से पहले उसके कार्यों की विस्तृत समीक्षा की जाए। इसमें श्रम कानूनों, वैधानिक प्रावधानों और अनुबंध की शर्तों के अनुपालन की जांच अनिवार्य की जाए।
पुरुष परिचालकों को भी सीधे विभागीय अनुबंध पर लेने की मांग
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ज्ञापन का प्रमुख मुद्दा प्रदेश के सभी आउटसोर्स पुरुष परिचालकों को सीधे विभागीय अनुबंध पर समायोजित करने का है। परिचालकों का कहना है कि वर्तमान में संविदा चालकों की भर्ती सीधे विभागीय अनुबंध के माध्यम से की जाती है, जबकि महिला परिचालकों की भर्ती भी सीधे विभागीय अनुबंध पर की जा रही है।
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उनका कहना है कि समान प्रकृति का कार्य करने वाले आउटसोर्स पुरुष परिचालकों को अलग व्यवस्था के तहत रखना न्याय, समानता और प्रशासनिक निष्पक्षता की भावना के अनुरूप नहीं है। ऐसे में जिस प्रकार संविदा चालक और महिला परिचालक सीधे विभागीय अनुबंध पर कार्यरत हैं, उसी प्रकार आउटसोर्स पुरुष परिचालकों का भी विभागीय अनुबंध पर समायोजन किया जाए।
2012 से पहले हुए समायोजन का दिया हवाला https://www.facebook.com/share/r/1DHeaKmZd9/
ज्ञापन में यह भी उल्लेख किया गया है कि वर्ष 2012 से पहले भी परिवहन निगम में आउटसोर्स कंपनियों के माध्यम से परिचालकों की नियुक्तियां की गई थीं। परिचालकों के अनुसार, उस समय विभाग ने सहानुभूतिपूर्वक विचार करते हुए उन परिचालकों का सीधे विभागीय अनुबंध पर समायोजन किया था।
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वर्तमान आउटसोर्स परिचालकों ने मांग की है कि पूर्व में अपनाई गई व्यवस्था और नियमावली के आधार पर उनके मामले पर भी विचार किया जाए तथा सभी पात्र आउटसोर्स पुरुष परिचालकों को सीधे विभागीय अनुबंध पर समायोजित किया जाए।
आउटसोर्स व्यवस्था समाप्त कर विभागीय अनुबंध को प्राथमिकता देने की मांग
ज्ञापन में भविष्य में आउटसोर्स एजेंसियों पर निर्भरता कम करने अथवा समाप्त करने और विभागीय अनुबंध व्यवस्था को प्राथमिकता देने की मांग भी की गई है। परिचालकों का कहना है कि इससे वेतन में देरी, EPF-ESI संबंधी अनियमितताओं और सेवा संबंधी समस्याओं का स्थायी समाधान हो सकता है।
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परिचालकों ने प्रबंध निदेशक से ज्ञापन पर सहानुभूतिपूर्वक विचार करते हुए कर्मचारियों के वैधानिक अधिकारों, सामाजिक सुरक्षा और सम्मानजनक कार्य परिस्थितियों को ध्यान में रखकर आवश्यक प्रशासनिक एवं विधिक कार्रवाई करने की मांग की है।





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