- UGC की गाइडलाइन्स पर बवाल, एकतरफा फैसलों का आरोप
- शिक्षा सुधार के नाम पर समाज को बांटने की साजिश नहीं चलेगी – विरोधी स्वर
- क्या वोटबैंक के लिए हिंदुओं को तोड़ा जा रहा
नई दिल्ली:-UGC को लेकर जारी हालिया गाइडलाइन्स पर तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। विभिन्न सामाजिक और शैक्षणिक संगठनों का कहना है कि UGC द्वारा बनाए गए दिशा-निर्देश एक ही पक्ष को ध्यान में रखकर तैयार किए गए हैं, जिससे देश में असंतोष और भ्रम की स्थिति पैदा हो रही है।
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आलोचकों का आरोप है कि शिक्षा व्यवस्था में सुधार के नाम पर ऐसे फैसले लागू किए जा रहे हैं, जो समाज को जोड़ने के बजाय विभाजित करने का काम कर रहे हैं। उनका कहना है कि जातिविहीन समाज की बात करना तब तक अधूरा है, जब तक सभी वर्गों के साथ समान और संतुलित व्यवहार न हो।
‘देश को भूतकाल की ओर धकेल रहे फैसले’
विरोध करने वालों का कहना है कि UGC की नीतियां देश को आगे ले जाने के बजाय पुरानी सामाजिक बहसों में उलझा रही हैं। शिक्षा का उद्देश्य योग्यता और अवसरों को बढ़ावा देना होना चाहिए, न कि किसी विशेष विचारधारा को थोपना।
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संवाद और समीक्षा की मांग
बयान में मांग की गई है कि UGC अपने फैसलों की पुनः समीक्षा करे और सभी पक्षों, शिक्षाविदों व सामाजिक संगठनों से संवाद स्थापित कर संतुलित और न्यायसंगत गाइडलाइन्स जारी करे, ताकि शिक्षा व्यवस्था मजबूत हो और किसी वर्ग के साथ अन्याय न हो।
यूजीसी क़ानून में ऐसा क्या जिसके कारण हो रहा विरोध
नियमों में एक वर्ग की बड़ी अनदेखी बताई जा रही है। जहाँ इस क़ानून के शिकायती दायरे से बाहर कर दिया गया है वही सामान्य वर्ग को सिर्फ़ आरोपी के तौर पर देखा जा रहा हैं। फिरहाल सुप्रीम कोर्ट ने ऐसे क़ानूनों को सामाजिक समरसता को ख़त्म करने जैसा माना है । कोर्ट ने केंद्र सरकार और यूजीसी को भी नोटिस भेजा है । और चीफ जस्टिस ऑफ़ इंडिया सूर्यकांत स्वयं मामले की सुनवाई कर रहे हैं ।




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