- जमानत याचिका खारिज होने के बाद जेएनयू में आधी रात प्रदर्शन
- विवादित नारों के वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल
- सियासी दलों में तीखी प्रतिक्रिया, प्रशासन अलर्ट
- अभिव्यक्ति की आज़ादी बनाम मर्यादा पर बहस तेज
- शरजील इमाम और उमर ख़ालिद को जमानत न मिलने पर छात्रों का प्रदर्शन, वीडियो वायरल
न्यूज़ डेस्क
नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट द्वारा 2020 दिल्ली दंगों से जुड़े मामलों में शरजील इमाम और उमर ख़ालिद को जमानत न दिए जाने के बाद बुधवार रात जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) परिसर में कुछ छात्र संगठनों ने विरोध प्रदर्शन किया। इस दौरान लगाए गए कुछ विवादित और आपत्तिजनक नारों के वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गए, जिसके बाद मामला राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में चर्चा का विषय बन गया है।
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फैसले के बाद भड़का विरोध
छात्रों का कहना है कि लंबे समय से जेल में बंद आरोपियों को जमानत न मिलना न्यायसंगत नहीं है। प्रदर्शनकारियों ने रिहाई की मांग को लेकर नारेबाजी की और न्याय प्रक्रिया पर सवाल उठाए। हालांकि, इसी बीच कुछ नारों को लेकर तीखी आलोचना भी शुरू हो गई।
वायरल वीडियो से बढ़ा विवाद
सोशल मीडिया पर वायरल हुए वीडियो में प्रधानमंत्री और गृह मंत्री के खिलाफ लगाए गए कुछ नारे सामने आए हैं, जिन्हें कई राजनीतिक दलों और संगठनों ने अभद्र और अस्वीकार्य बताया है। प्रशासनिक सूत्रों के मुताबिक वीडियो की सत्यता और संदर्भ की जांच की जा रही है।
राजनीतिक प्रतिक्रियाएं तेज
घटना के बाद सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने नारेबाजी की कड़ी निंदा करते हुए इसे देश की संस्थाओं और लोकतांत्रिक मर्यादाओं के खिलाफ बताया। वहीं, कुछ विपक्षी नेताओं और छात्र संगठनों ने कहा कि शांतिपूर्ण विरोध का अधिकार संविधान प्रदत्त है, लेकिन भाषा और मर्यादा का पालन होना चाहिए।
प्रशासन की नजर
विश्वविद्यालय प्रशासन ने कहा है कि परिसर में शांति बनाए रखना सर्वोच्च प्राथमिकता है। यदि किसी ने नियमों का उल्लंघन किया है तो नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। सुरक्षा व्यवस्था भी बढ़ा दी गई है।
पृष्ठभूमि
शरजील इमाम और उमर ख़ालिद पर 2020 दिल्ली दंगों से जुड़े मामलों में यूएपीए सहित गंभीर धाराओं में मुकदमा चल रहा है। सुप्रीम कोर्ट ने अभियोजन की सामग्री का हवाला देते हुए जमानत याचिकाएं खारिज की हैं।
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निष्कर्ष: जेएनयू में हुए विरोध ने एक बार फिर अभिव्यक्ति की आज़ादी और जिम्मेदारी के बीच की बहस को तेज कर दिया है। मामले पर प्रशासनिक जांच और राजनीतिक प्रतिक्रियाओं का सिलसिला जारी है।




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