- परमिट व्यवस्था लागू करने की तैयारी
- फिटनेस फेल ई-रिक्शों पर होगी सख्त कार्रवाई
न्यूज़ डेस्क
लखनऊ।उत्तर प्रदेश में बढ़ती ट्रैफिक समस्या और सड़क सुरक्षा को लेकर सरकार अब ई-रिक्शा और ई-ऑटो के संचालन पर सख्त कदम उठाने जा रही है। प्रदेश में पहली बार ई-रिक्शा और ई-ऑटो के लिए परमिट व्यवस्था लागू करने की तैयारी शुरू हो गई है। शासन ने इस संबंध में परिवहन मुख्यालय से विस्तृत रिपोर्ट तलब की है।
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जिलों से मांगी गई जमीनी रिपोर्ट
शासन के निर्देश पर प्रदेश के सभी जिलों के आरटीओ (RTO) को अपने-अपने शहरों में चल रहे ई-रिक्शा और ई-ऑटो की स्थिति पर रिपोर्ट तैयार करने को कहा गया है। इसमें कुल संख्या, रूट, फिटनेस, पंजीकरण और ट्रैफिक पर असर जैसी जानकारियां शामिल होंगी।
लखनऊ में हालात सबसे गंभीर
राजधानी लखनऊ में 70 हजार से अधिक ई-रिक्शे पंजीकृत बताए जा रहे हैं। इनमें से 25 से 30 हजार ई-रिक्शे फिटनेस मानकों पर खरे नहीं उतरते। कई ई-रिक्शे बिना वैध फिटनेस, तय मानकों से ज्यादा सवारियां ढोते हुए सड़कों पर दौड़ रहे हैं, जिससे दुर्घटनाओं का खतरा बढ़ गया है।
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जाम की बड़ी वजह बने ई-रिक्शे
परिवहन विभाग की रिपोर्ट के मुताबिक, शहर के प्रमुख चौराहों, बाजारों और संकरी सड़कों पर ई-रिक्शों के कारण जाम की समस्या गंभीर रूप ले चुकी है। अवैध पार्किंग, अनियंत्रित रूट और नियमों की अनदेखी से यातायात व्यवस्था चरमरा रही है।
परमिट और नियमों से लगेगी लगाम
सरकार का मानना है कि परमिट व्यवस्था लागू होने के बाद ई-रिक्शा और ई-ऑटो की संख्या नियंत्रित की जा सकेगी। साथ ही रूट तय होंगे, फिटनेस जांच सख्त होगी और नियमों का उल्लंघन करने वालों पर कार्रवाई आसान होगी।
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परिवहन विभाग नए नियम बनाकर ई-रिक्शा संचालन पर लगाम लगाने की दिशा में काम कर रहा है।
आम जनता को मिलेगा राहत
सरकार के इस कदम से जहां एक ओर ट्रैफिक जाम और सड़क हादसों में कमी आने की उम्मीद है, वहीं दूसरी ओर आम यात्रियों को भी सुरक्षित और व्यवस्थित परिवहन व्यवस्था मिल सकेगी।
संकेत साफ हैं—अब प्रदेश में ई-रिक्शा और ई-ऑटो अनियंत्रित नहीं चलेंगे, नियमों के दायरे में ही सड़क पर उतरेंगे।
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