पतंजलि का घी गुणवत्ता जांच में फेल — उपभोक्ताओं के साथ विश्वासघात, कोर्ट ने लगाया जुर्माना

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  • पाँच साल बाद आया कोर्ट का फैसला, पतंजलि घी गुणवत्ता जांच में असफल
  • 1.40 लाख का जुर्माना—करोड़ों की बिक्री के बीच दंड पर उठे सवाल
  • 2020 में लिया गया नमूना 2025 में फेल घोषित, उपभोक्ताओं की सेहत पर खतरा
  • खाद्य सुरक्षा विभाग की कार्रवाई—मानक से नीचे पाए गए कई पैरामीटर
  • घी की शुद्धता संदिग्ध, उपभोक्ताओं के विश्वास से खिलवाड़
  • विशेषज्ञ बोले: इतनी बड़ी कंपनी पर इतना मामूली जुर्माना पर्याप्त नहीं

विशेष संवाददाता 

देहरादूनउत्तराखंड सरकार के खाद्य सुरक्षा विभाग द्वारा वर्ष 2020 में लिए गए पतंजलि देसी घी के नमूने गुणवत्ता जांच में फेल पाए गए थे। इस मामले में लंबी कानूनी प्रक्रिया के बाद अब वर्ष 2025 में कोर्ट का अंतिम फैसला आया है, जिसमें पतंजलि पर खाद्य सुरक्षा मानकों के उल्लंघन का दोष सिद्ध होने पर जुर्माना लगाया गया है।

कोर्ट ने कंपनी पर 1.40 लाख रुपये का आर्थिक दंड लगाया है। मामला पाँच वर्षों तक चला, इस दौरान पतंजलि का देसी घी पूरे देश में करोड़ों रुपये की बिक्री करता रहा। उपभोक्ता संगठन और खाद्य विभाग मानते हैं कि जांच में असफल घी की बिक्री जारी रहना उपभोक्ताओं के साथ विश्वासघात और स्वास्थ्य सुरक्षा से खिलवाड़ है।

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कैसे शुरू हुआ मामला?

● वर्ष 2020 में खाद्य सुरक्षा विभाग की टीम ने हरिद्वार क्षेत्र से पतंजलि ब्रांड के देसी घी का नमूना लिया था।

● जांच में पाया गया कि घी में मानक स्तर की शुद्धता, फैट वैल्यू और एसिडिटी पैरामीटर निर्धारित नियमों के अनुरूप नहीं थे।

● नमूना फेल होने पर विभाग ने कोर्ट में मामला दर्ज किया।

फैसले में लगा पाँच साल का समय

न्यायालय ने सुनवाई के बाद वर्ष 2025 में अपना फैसला सुनाया। विभागीय अधिकारियों के अनुसार—

  • नमूना लेने से लेकर रिपोर्ट, वाद दाखिल करने, नोटिस, तर्क व सुनवाई की प्रक्रिया में समय लगा।
  • इसी दौरान घी का उत्पादन व बिक्री लगातार जारी रही।
  • विभाग इसे खाद्य सुरक्षा कानूनों में मौजूद लंबी प्रक्रिया का परिणाम मानता है।

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जुर्माना सिर्फ 1.40 लाख — सवालों के घेरे में व्यवस्था

उपभोक्ता अधिकार कार्यकर्ताओं का कहना है कि—

  • जिस उत्पाद की देशभर में करोड़ों-करोड़ रुपये की बिक्री होती है,
  • जिसकी गुणवत्ता पर गंभीर सवाल उठते हैं,
  • उसके लिए मात्र 1.4 लाख रुपये का जुर्माना बेहद कम है।

ये दंड राशि कंपनियों पर रोक लगाने के बजाय औपचारिकता जैसे दिखाई देती है। विशेषज्ञों का कहना है कि उपभोक्ताओं की सुरक्षा के लिए ऐसे मामलों में सख्त कार्रवाई और भारी दंड तय होना चाहिए।

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खाद्य विभाग ने क्या कहा?

जारी प्रेस नोट के अनुसार—

  • पतंजलि का नमूना खाद्य सुरक्षा मानकों पर खरा नहीं उतरा।
  • उपभोक्ताओं की सेहत के साथ खिलवाड़ करने वाली किसी भी कंपनी को बख्शा नहीं जाएगा।
  • विभाग आगे भी बाजार से नमूने उठाकर कार्रवाई जारी रखेगा।

उपभोक्ताओं के लिए चेतावनी

खाद्य विशेषज्ञों ने सलाह दी है कि—

  • ब्रांड देखकर भरोसा न करें,
  • पैकिंग की तारीख, गुणवत्ता संकेतक व लेबलिंग हमेशा जांचें,
  • संदिग्ध गुणवत्ता वाले उत्पादों की शिकायत तुरंत खाद्य सुरक्षा विभाग को करें।

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निष्कर्ष

पतंजलि घी के फेल नमूने ने एक बार फिर देश की खाद्य सुरक्षा व्यवस्था, मॉनिटरिंग और दंड प्रक्रिया पर सवाल खड़े किए हैं।

पाँच साल की देरी और कम दंड ने उपभोक्ताओं की नाराज़गी बढ़ाई है।

इस घटना ने साफ दिखा दिया है कि खाद्य मानकों की सख्ती और तेज़ कानूनी प्रक्रिया जरूरी है, ताकि किसी भी ब्रांड द्वारा उपभोक्ताओं के स्वास्थ्य से खिलवाड़ न किया जा सके।

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