- भव्य चुनरी यात्रा, मंगल पाठ और छप्पन भोग की होगी विशेष व्यवस्था
रायबरेली। श्री माँ नारायणी सेवा समिति, रायबरेली के तत्वाधान में पहली बार श्री राणी सती दादी का चुनरी उत्सव बड़े ही धूमधाम और श्रद्धा भाव से मनाया जाएगा। यह आयोजन दादी जी के जन्मोत्सव एवं प्राकट्य दिवस के पावन अवसर पर किया जा रहा है, जो मंगसीर मास के कृष्ण पक्ष की नवमी तिथि को मनाया जाता है। इस वर्ष यह कार्यक्रम 13 नवंबर 2025, दिन बृहस्पतिवार को आयोजित होगा।
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कार्यक्रम का मुख्य आयोजन राणी सती दादी मंदिर, अमरेशपुरी कॉलोनी, कानपुर रोड, रायबरेली में होगा। समिति के अध्यक्ष संजय बंसल ने बताया कि राणी सती दादी मंदिर की स्थापना 28 फरवरी 2012 (बसंत पंचमी) के दिन की गई थी, और तब से प्रत्येक माह नवमी के दिन दादी का मंगल पाठ निरंतर आयोजित किया जा रहा है।
इस बार का उत्सव विशेष रहेगा, क्योंकि इसमें पहली बार चुनरी यात्रा का आयोजन किया जा रहा है। कार्यक्रम संयोजक अभिषेक गोयल ने बताया कि चुनरी यात्रा सुबह 10 बजे बेलीगंज से प्रारंभ होकर स्टेशन रोड, घंटाघर, सुपर मार्केट, अस्पताल चौराहा, डीएम चौराहा, जीजीआईसी स्कूल के सामने से होते हुए पुलिस लाइन चौराहा के रास्ते अमरेशपुरी स्थित दादी मंदिर पहुंचेगी। यात्रा के दौरान विनय अग्रहरि (श्रीयश साउंड) द्वारा भक्ति भजनों का लाइव प्रसारण किया जाएगा। यात्रा लगभग 12 बजे मंदिर पहुंचेगी, जहां प्रसाद वितरण की व्यवस्था रहेगी।
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उपाध्यक्ष महेश नारायण अग्रवाल ने बताया कि यात्रा मार्ग में लगभग 25 तोरण द्वार लगाए जाएंगे, जबकि हरीश मुरारका ने कहा कि पूरा कार्यक्रम लाइव प्रसारित किया जाएगा। गोविंद बंसल ने जानकारी दी कि यात्रा में 528 फीट लंबी चुनरी और दादी का भव्य दरबार मुख्य आकर्षण रहेंगे।
दोपहर 3 बजे से दादी का मंगल पाठ प्रारंभ होगा। इस बार कोलकाता से हर्षिता डिडवानीया जी विशेष रूप से दादी का मंगल पाठ करेंगी। कार्यक्रम संयोजिका अर्चना सिकरिया, प्रियंका अग्रवाल और शिखा मुरारका ने बताया कि दादी का दरबार सजाने के लिए दिल्ली से विशेष फूल मंगाए जा रहे हैं। दादी को छप्पन भोग और सवामनी का भोग अर्पित किया जाएगा, साथ ही गजरा उत्सव भी मनाया जाएगा।
अंजु बंसल ने बताया कि मंगल पाठ के दौरान दादी का 16 श्रृंगार, मेहंदी, और चुनरी उड़ाकर विवाह का प्रतीकात्मक आयोजन किया जाएगा। इसके उपरांत सभी भक्तों के लिए महाप्रसाद की व्यवस्था की गई है।
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कार्यक्रम की तैयारियों में उमेश सिकरिया, किरण बंसल, नरेश जैन, मोहित अग्रवाल, भवेश अग्रवाल, अनूप अग्रवाल, रश्मि बंसल, रितेश अग्रवाल, अमित अग्रवाल, करुण कंसल, शील निधि अग्रवाल सहित समिति के अनेक सदस्य सक्रिय रूप से जुड़े हुए हैं।
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यह पावन उत्सव नारी शक्ति, सुहाग की रक्षा और परिवार की मंगलकामना का प्रतीक है। भक्तों का विश्वास है कि राणी सती दादी, देवी दुर्गा के स्वरूप में अवतरित हुईं और उनका जीवन पति भक्ति, धर्म और संस्कृति की रक्षा का प्रेरणादायी उदाहरण प्रस्तुत करता है।




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