उप्र में ट्रक चालकों से घूस लेते पकड़े गए पुलिसकर्मियों पर बड़ी कार्रवाई

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  • DGP ने 11 अधिकारी निलंबित किए, रेंज/विजिलेंस टीमें पहुँचीं, पूछताछ व जांच तेज
लखनऊ / चित्रकूट / बांदा / कौशाम्बी, 25 अक्टूबर 2025 — सोशल मीडिया पर वायरल हुए एक स्टिंग -वीडियो के बाद उत्तर प्रदेश पुलिस ने भ्रष्टाचार पर बड़ी कार्रवाई की है। डीजीपी राजीव कृष्णा (Rajeev Krishna) ने वीडियो में स्पष्ट रूप से दिख रहे पुलिसकर्मियों के खिलाफ सख्त रुख अपनाते हुए कुल 11 पुलिस कर्मियों को निलंबित करने का आदेश दिया है। निलंबित व्यक्तियों में एक इंस्पेक्टर, चार सब-इंस्पेक्टर (एक महिला सब-इंस्पेक्टर सहित) और पांच कॉन्स्टेबल शामिल बताए जा रहे हैं — ये कर्मी चित्रकूट , बांदा और कौशाम्बी जिले के बताए जा रहे ठिकानों पर तैनात थे।
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वायरल वीडियो क्या दिखाता है
वीडियो में दिखाया गया है कि हाईवे या चेकपॉइंट पर तैनात पुलिसकर्मी ट्रक चालकों/वाहन चालकों से नियमित रूप से “इंट्री-फीस” या “पास” के नाम पर पैसे वसूल रहे थे — खासकर ओवरलोडेड ट्रकों को जाने देने के एवज़ में। वीडियो के वायरल होते ही सोशल मीडिया और स्थानीय परिवहन समुदाय में तीव्र प्रतिक्रिया हुई और मामला उच्च अधिकारियों तक पहुँचा।
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 DGP का फौरन आदेश और शून्य-सहनशीलता नीति
डीजीपी राजीव कृष्णा के कार्यालय से जारी बयान में कहा गया कि वायरल फुटेज को बहुत गंभीरता से लिया गया और “शून्य-सहनशीलता (zero-tolerance)” की नीति के अंतर्गत त्वरित निलंबन व जांच आदेशित किए गए हैं। DGP ने संबंधित रेंज व जिला अधिकारियों को मामले की त्वरित और निष्पक्ष जांच के निर्देश दिए हैं तथा कहा गया है कि जो भी दोषी पाए जाएंगे उन पर कड़ी विभागीय व फौजी (आवश्यकतानुसार कानूनी) कार्रवाई होगी।  
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 रेंज / विजिलेंस-टीम की भूमिका — पकड़े जाने और पूछताछ का क्रम
वीडियो के सामने आने के तुरंत बाद राज्य पुलिस के रेंज अधिकारी एवं स्थानीय वरिष्ठ (DIG/ADG स्तर पर) सक्रिय हुए। स्थानीय स्तर पर बनी टीमों ने चेकपॉइंटों और संबंधित थानों में छानबीन की और संदिग्ध कर्मियों को प्राथमिक पूछताछ के लिए रोककर हिरासत में लिया — साथ ही वायरल फुटेज और संबंधित सोशल-मीडिया क्लिप को सबूत्र (evidence) के रूप में संलग्न किया गया। कुछ रिपोर्टों में बताया गया कि रेंज-स्तर पर अतिरिक्त गुप्त (trap/ sting) जाँच भी शुरू कर दी गई है ताकि किसी बड़े नेटवर्क का पता लगाया जा सके। (नोट: मामले में फौरन निलंबन और विभागीय जाँच के आदेश दिए गए; कुछ मीडिया रिपोर्टों ने यह भी बताया कि रेंज अधिकारियों के निर्देश पर स्थानीय स्तर पर स्थानांतरण/रीशफल भी किए गए।)
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 क्या यह व्यापक रैकेट है? — जांच का लक्ष्य
प्रारम्भिक प्रवर्तक जानकारी  का लक्ष्य यही है कि क्या ये घटनाएँ केवल कुछ स्थानीय कर्मियों की ग़लतियों का नतीजा हैं, या कहीं कोई संगठित रेंजी/नेटवर्क  चल रहा है जो विभिन्न जिलों में व्यवस्थित तरीके से काम करता रहा है। इसलिए रेंज अधिकारी और सर्किल ऑफिसर दोनों स्तरों पर प्रमाणीकरण  और ट्रांसफर-रिकॉर्ड जैसी चीजों की पड़ताल भी की जा रही है।
 निष्कर्ष — जनता के लिए क्या मायने रखता है
यह मामला दो चीजें स्पष्ट करता है: (1) सोशल मीडिया और sting-footage आज किसी भी सरकारी कृत्य को उजागर कर सकते हैं और तुरंत कार्रवाई पर दबाव बना सकते हैं; (2) पुलिस-विभाग में पारदर्शिता व जवाबदेही बनाए रखने के लिए निरंतर निगरानी, समय-समय पर रैंडम ऑडिट और सार्वजनिक शिकायत निवारण तंत्र को और मजबूत किया जाना चाहिए। जनता का भरोसा बहाल करने के लिए विभागीय कार्रवाई के साथ-साथ दोषियों के खिलाफ त्वरित और कड़ा अनुशासनिक तथा कानूनी कार्यवाही आवश्यक है।

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