“दीपावली पर कैसे करें पूजा — क्या करें, क्या न करें? जानिए परंपरा, विधि और आधुनिक सावधानियाँ”

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  • दीपों के पर्व पर लक्ष्मी और गणेश की आराधना में छोटे-छोटे नियमों का बड़ा महत्व; पूजा का सही तरीका अपनाएँ और भूलों से बचें।

नई दिल्ली, 20 अक्टूबर | त्यौहार विशेष रिपोर्ट

दीपावली यानी ‘अंधकार पर प्रकाश की विजय’ — यह केवल दीप जलाने का पर्व नहीं, बल्कि घर-परिवार में सुख-समृद्धि, शांति और सकारात्मक ऊर्जा आमंत्रित करने का दिन भी है।

हर साल की तरह इस बार भी लोग लक्ष्मी-गणेश पूजन की तैयारी में जुटे हैं, लेकिन कई लोग अब भी यह जानना चाहते हैं कि —

पूजा का सही समय क्या है?

 किन वस्तुओं का प्रयोग ज़रूरी है?

 कौन-सी चीजें नहीं करनी चाहिए?

 पूजा का मुहूर्त (Lakshmi Puja Muhurat 2025)

इस वर्ष दीपावली 20अक्टूबर (सोमवार ) को मनाई जाएगी।

पंडितों के अनुसार लक्ष्मी पूजन का शुभ मुहूर्त रहेगा:

 सायंकाल 6:10 बजे से 8:40 बजे तक (स्थानीय समयानुसार)

इस अवधि को “प्रदोष काल” और “स्थिर लग्न” कहा जाता है, जो माँ लक्ष्मी के आगमन के लिए सर्वश्रेष्ठ माना गया है।

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पूजन की आवश्यक वस्तुएँ

पूजा के लिए निम्न वस्तुओं की व्यवस्था करनी चाहिए —

  • देवी लक्ष्मी व भगवान गणेश की मूर्तियाँ या चित्र
  • नया लाल या पीला कपड़ा
  • चांदी या पीतल की थाली
  • रोली, चावल, हल्दी, सुपारी, पान, नारियल
  • पंचमेवा, मिठाई, दीपक, धूप-बत्ती
  • गंगाजल, सिक्के, कलश, फूल, और कपूर

विशेषज्ञों का मानना है कि पूजा-सामग्री में कृत्रिम प्लास्टिक सामग्री से परहेज करना चाहिए, क्योंकि यह न तो पारंपरिक है और न पर्यावरण अनुकूल।

पूजा की विधि (Step-by-Step Process)

  1. घर की सफाई और सजावट:
    दीपावली से पहले घर को स्वच्छ रखें। कहा जाता है कि “स्वच्छता ही लक्ष्मी का निवास” है। मुख्य द्वार पर तोरण और रंगोली बनाना शुभ होता है।
  2. स्थापना:
    पूजा स्थल पर लाल कपड़ा बिछाकर माँ लक्ष्मी और गणेश जी की मूर्ति रखें।
    मूर्तियों के दाईं ओर गणेश जी और बाईं ओर लक्ष्मी जी को बैठाया जाता है।
  3. आवाहन और संकल्प:
    गंगाजल छिड़कें और संकल्प लें — “माता लक्ष्मी और श्री गणेश का विधि-विधान से पूजन कर रहा/रही हूँ।”
  4. दीप प्रज्ज्वलन और पूजा:
    घी या तेल का दीप जलाकर आरंभ करें।
    फूल, चावल, मिठाई और सिक्के चढ़ाएँ।
    लक्ष्मी मंत्र —
    “ॐ श्रीं ह्रीं क्लीं महालक्ष्म्यै नमः”
    और गणेश मंत्र —
    “ॐ गं गणपतये नमः”
    — का 11 बार जाप करें।
  5. आरती और प्रसाद:
    दीपक घुमाकर आरती करें — पहले गणेश जी की, फिर लक्ष्मी जी की।
    प्रसाद में खीर, लड्डू या कोई मीठा पदार्थ चढ़ाएँ।
    परिवार के सभी सदस्य मिलकर आरती में शामिल हों।

क्या करें (Do’s)

सफाई और सजावट पर ध्यान दें: घर का हर कोना स्वच्छ और प्रकाशमय होना चाहिए।

दीप दक्षिण दिशा में जलाएँ: कहा जाता है इससे पितरों की कृपा प्राप्त होती है।

नए बहीखाते, धन और व्यवसाय से जुड़ी वस्तुओं की पूजा करें: यह नए वित्तीय वर्ष की शुभ शुरुआत मानी जाती है।

गाय, कुत्ते और गरीबों को भोजन दें: इसे पुण्यदायक और लक्ष्मीप्राप्ति का कारक माना गया है।

दीपक बुझाएँ नहीं, स्वयं जलने दें: यह शुभ संकेत है।

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क्या न करें (Don’ts)

तेल या घी का दीप बीच पूजा में न बुझाएँ।

क्रोध, बहस या ऊँची आवाज़ से बचें। दीपावली की रात को शांति बनाए रखना शुभ माना जाता है।

अल्कोहल या मांसाहार से दूरी रखें। इस दिन सात्विक भोजन ही करें।

झूठ या ऋण व्यवहार न करें। कहा जाता है कि इस दिन उधार देना या लेना आर्थिक बाधा उत्पन्न करता है।

रात में झाड़ू न लगाएँ। यह लक्ष्मी के अपमान के समान माना जाता है।

पर्यावरण के प्रति जागरूक दीपावली

पंडितों और पर्यावरण विशेषज्ञों का कहना है कि इस बार लोगों को ‘ग्रीन दीपावली’ मनाने पर जोर देना चाहिए —

  • मिट्टी के दीए जलाएँ,
  • बायोडिग्रेडेबल सजावट करें,
  • पटाखों की जगह दीपों से रोशनी फैलाएँ।

पर्यावरण विशेषज्ञ डॉ. रश्मि त्रिपाठी कहती हैं —

“दीपावली का असली अर्थ प्रकाश फैलाना है, प्रदूषण नहीं। मिट्टी के दीए और देसी तेल से घर भी रौशन होता है, और प्रकृति भी सुरक्षित रहती है।”

पूजा के बाद क्या करें

  • पूजन के बाद माँ लक्ष्मी की आरती के साथ धन कुबेर की प्रार्थना करें।
  • चांदी या तांबे के सिक्कों को गुलक में रखकर सालभर पूजा स्थान पर रखें।
  • दीपक जलाकर दरवाज़े पर रखें ताकि लक्ष्मी का आगमन हो।
  • मिठाइयाँ बाँटें, परिवार के साथ दीपक जलाएँ, और जरूरतमंदों की मदद करें।

निष्कर्ष

दीपावली का संदेश केवल धन और उत्सव नहीं, बल्कि आंतरिक प्रकाश और कर्तव्य की भावना है।

परंपरा के साथ अगर सजगता और संयम जोड़ा जाए, तो यह पर्व घर में सिर्फ उजाला नहीं, बल्कि शांति, समृद्धि और सद्भावना भी लाता है।

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