- संविदा कर्मियों का हल्ला बोल: नियमितीकरण की माँग तेज
- प्रदेशभर से पहुंचे कर्मचारी, सरकार पर दबाव बढ़ा
- समान कार्य के बदले समान वेतन की मांग दोहराई
- ड्यूटी में सुरक्षा, बीमा और सुविधाओं की कमी पर नाराज़गी
- मनमानी ड्यूटी और अचानक टर्मिनेशन पर कर्मचारियों की आपत्ति
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लखनऊ।उत्तर प्रदेश राज्य सड़क परिवहन निगम (UPSRTC) के संविदा और आउटसोर्स कर्मचारियों ने आज राजधानी में बड़ी सभा कर अपनी लंबित माँगों को लेकर सरकार पर दबाव तेज कर दिया। लंबे समय से सेवाएँ दे रहे इन कर्मचारियों का कहना है कि वे निगम की “रक्त-धमनी” की तरह 24×7 काम कर रहे हैं, लेकिन उन्हें स्थायी कर्मचारियों जैसी सुविधाएँ और सुरक्षा नहीं मिल रही।
बैठक में प्रदेश के सभी प्रमुख डिपो—लखनऊ, कानपुर, आगरा, गोरखपुर, वाराणसी, प्रयागराज, मेरठ, बरेली समेत 60 से अधिक जिलों—से लगभग कई सौ कर्मचारियों ने हिस्सा लिया। सभा के दौरान कर्मचारियों ने एक स्वर में कहा कि निगम का 60 से 70 प्रतिशत संचालन संविदा और आउटसोर्स कर्मचारियों के भरोसे चलता है, फिर भी उन्हें न तो नौकरी की सुरक्षा है, न वेतन में स्थिरता, और न ही भविष्य की कोई गारंटी।
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मुख्य मुद्दे जो कर्मचारियों ने उठाए
1. नियमितीकरण की माँग
कर्मचारियों का कहना है कि 8–10 वर्षों से लगातार कार्यरत संविदा कर्मचारियों को स्थायी दर्जा दिया जाए। उनका कहना है कि जहाँ निगम के स्थायी कर्मचारियों को नियमित वेतन, छुट्टियाँ, PF, पेंशन और मेडिकल सुविधाएँ मिलती हैं, वहीं संविदा कर्मियों को वही काम करने के बाद भी केवल एक निश्चित मानदेय मिलता है।
2. सुरक्षा और बीमा का मुद्दा
कई चालक और परिचालक ड्यूटी के दौरान होने वाली दुर्घटनाओं का उदाहरण देते हुए बोले कि संविदा कर्मचारियों के लिए किसी भी प्रकार का बीमा या वित्तीय सहायता का ठोस प्रावधान नहीं है।
3. समान कार्य, समान वेतन
कर्मचारियों ने कहा कि जब संविदा चालक वही रूट चलाते हैं, वही ट्रिप करते हैं और वही जोखिम उठाते हैं, तो उन्हें स्थायी कर्मचारियों जैसा वेतन मिलना चाहिए।
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4. मनमानी ड्यूटी और अचानक टर्मिनेशन
कर्मचारी संगठनों ने आरोप लगाया कि कई डिपो में बिना नोटिस के ड्यूटी हटाना, मनमानी शेड्यूल, और अचानक सर्विस समाप्त कर देना आम बात हो गई है।
सभा में क्या हुआ?
सभा के दौरान संगठन नेताओं ने सरकार से मांगे न माने जाने पर चरणबद्ध आंदोलन की चेतावनी दी। उन्होंने कहा कि अगला कदम प्रदेश-स्तरीय प्रदर्शन, फिर शांतिपूर्ण धरना और अंत में कार्य बहिष्कार की रणनीति हो सकती है।
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कुछ कर्मचारियों ने मंच से अपने अनुभव साझा किए—
- एक चालक ने बताया कि 9 साल की नौकरी के बाद भी वह आज भी संविदा पर है और परिवार चलाना मुश्किल हो रहा है।
- एक महिला परिचालक ने कहा कि सुरक्षा और मातृत्व अवकाश जैसी सुविधाएँ संविदा कर्मचारियों को लगभग न के बराबर मिलती हैं।
सभा के दौरान कर्मचारियों ने “नियमितीकरण करो”, “समान वेतन-समान काम”, “संविदा कर्मियों का शोषण बंद करो” जैसे नारे भी लगाए।
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सरकार की प्रतिक्रिया?
अब तक सरकार या UPSRTC प्रबंधन की ओर से कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है। हालांकि, सूत्रों के अनुसार सरकार के स्तर पर इस मसले पर विचार किया जा रहा है और कर्मचारियों की माँगों पर आगे कोई निर्णय संभव है।
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कर्मचारियों का अंतिम संदेश
सभा के अंत में कर्मचारियों ने स्पष्ट कहा—
“नियमितीकरण हमारा अधिकार है, और अब इस संघर्ष को आखिरी मंज़िल तक लेकर जाएँगे।”




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